NEET Paper Leak: महाराष्ट्र के कोचिंग जगत में एम सर के नाम से मशहूर और रेणुकाई करियर सेंटर (RCC) के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। नीट पेपर लीक मामले में उनका नाम सामने आने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) उनसे लगातार पूछताछ कर रही है। आइए जानते हैं लातूर के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले शिवराज मोटेगांवकर ने कैसे इतना बड़ा कोचिंग साम्राज्य खड़ा किया और वह जांच एजेंसियों के रडार पर क्यों हैं।
10 बच्चों से की थी शुरुआत
शिवराज मोटेगांवकर की सफलता की कहानी काफी दिलचस्प है। लातूर के एक किसान परिवार में जन्मे शिवराज ने अपनी शुरुआत साइकिल पर घर-घर जाकर ट्यूशन पढ़ाने से की थी। 1990 के दशक के अंत में उन्होंने एक किराए के कमरे में सिर्फ 10 बच्चों के साथ कोचिंग पढ़ाना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में वह खुद बच्चों को केमिस्ट्री पढ़ाते थे और अपने हाथ से लिखे नोट्स बांटते थे। वह 11वीं और 12वीं के साथ प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को पढ़ाते थे।
‘लातूर पैटर्न’ से मिली पहचान
लातूर पैटर्न महाराष्ट्र भर में प्रतियोगी परीक्षाओं के टॉपर्स देने के लिए मशहूर हुआ वैसे-वैसे शिवराज का कोचिंग सेंटर भी बढ़ता गया। उनके पढ़ाए हुए बच्चे बताते हैं कि, एम सर ने ग्रामीण और कस्बों से आने वाले बच्चों के लिए केमिस्ट्री जैसे मुश्किल विषय को बहुत आसान बना दिया था। शिवराज खुद केमिस्ट्री में एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट हैं। शुरुआती दौर में उनकी कोचिंग ने कॉन्सेप्ट पर आधारित पढ़ाई और कम फीस के कारण स्टूडेंट्स को अपनी ओर खींचा।
आज कई शहरों में है सेंटर
आज आरसीसी क्लासेस के महाराष्ट्र के कई शहरों में सेंटर हैं। इनमें लातूर, पुणे, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, सोलापुर और कोल्हापुर शामिल हैं। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 40 हजार स्टूडेंट्स उनके यहां एडमिशन लेते हैं। समय के साथ उन्होंने डिजिटल एजुकेशन की ओर कदम बढ़ाया। सोशल मीडिया पर भी उनका बड़ा दबदबा है। इंस्टाग्राम पर उनके 66 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और यूट्यूब व्हाट्सएप के साथ-साथ प्ले स्टोर पर उनका अपना ऐप भी है जिसके जरिए राज्य भर के स्टूडेंट्स नीट और जेईई की तैयारी करते हैं।
CBI जांच के घेरे में क्यों आए एम सर?
नीट पेपर लीक मामले में रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि, कुलकर्णी पहले आरसीसी में पढ़ा चुके हैं। अब सीबीआई इसी कनेक्शन की जांच कर रही है कि कहीं कुलकर्णी और मोटेगांवकर के बीच कोई ऐसा पेशेवर संबंध तो नहीं है जिसके तार इस बड़े पेपर लीक से जुड़े हों। फिलहाल जांच एजेंसी हर एंगल से इस मामले की परतें खोलने में जुटी है।


