बेतिया जिले के बलिराम भवन के सभागार में शनिवार को बिहार राज्य आशा संघ एटक की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। संघ की जिला अध्यक्ष साधना देवी ने बैठक की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में पश्चिम चंपारण जिले के विभिन्न प्रखंडों से सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुट होकर आवाज उठाई। बैठक के दौरान आशा कर्मियों ने बताया कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य निष्ठापूर्वक कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित मानदेय और समय पर प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पा रही है। कई आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और कथित अनियमितताओं के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ”समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं दिख रही सरकार” आशा कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण अभियान, परिवार नियोजन, पोषण कार्यक्रम और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सब के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है। वक्ताओं ने बताया कि कई महीनों से प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित है, जिससे आशा कर्मियों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग बैठक में कार्यस्थल पर सुरक्षा, सम्मान और आवश्यक सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त, लंबित भुगतान जल्द जारी करने, कार्य के अनुरूप उचित पारिश्रमिक देने और विभागीय स्तर पर हो रही अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी की गई। संघ की नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बैठक के अंत में आशा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। बेतिया जिले के बलिराम भवन के सभागार में शनिवार को बिहार राज्य आशा संघ एटक की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। संघ की जिला अध्यक्ष साधना देवी ने बैठक की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में पश्चिम चंपारण जिले के विभिन्न प्रखंडों से सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुट होकर आवाज उठाई। बैठक के दौरान आशा कर्मियों ने बताया कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य निष्ठापूर्वक कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित मानदेय और समय पर प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पा रही है। कई आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और कथित अनियमितताओं के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ”समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं दिख रही सरकार” आशा कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण अभियान, परिवार नियोजन, पोषण कार्यक्रम और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सब के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है। वक्ताओं ने बताया कि कई महीनों से प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित है, जिससे आशा कर्मियों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग बैठक में कार्यस्थल पर सुरक्षा, सम्मान और आवश्यक सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त, लंबित भुगतान जल्द जारी करने, कार्य के अनुरूप उचित पारिश्रमिक देने और विभागीय स्तर पर हो रही अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी की गई। संघ की नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बैठक के अंत में आशा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।


