आरा शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम कर्मियों ने अब अपने अधिकारों की लड़ाई को लेकर आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। वर्षों से लंबित वेतनमान, एरियर और सेवा लाभ की मांग को लेकर आरा नगर निगम के सफाई कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल का असर पहले ही दिन से शहर की सफाई व्यवस्था पर साफ दिखाई दिया। निगम के 45 वार्डों में कचरा उठाव पूरी तरह ठप हो गया। जिससे कई इलाकों में गंदगी फैल रही है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े का अंबार नजर आया। ताला बंद कर किया प्रदर्शन हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में सफाई कर्मी, वार्ड सुपरवाइजर, ड्राइवर और अन्य कर्मचारी नगर निगम कार्यालय पहुंचे, जहां मुख्य गेट में ताला बंद कर धरना-प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। आंदोलनकारी कर्मियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन और सेवा से जुड़े कई मुद्दे लंबित हैं, लेकिन निगम प्रशासन गंभीर पहल नहीं कर रहा है। पूरे महीने का वेतन मिलना चाहिए संघ की अध्यक्ष पुष्पा सिंह कुशवाहा ने बताया कि कर्मचारियों को मात्र 10,200 रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है। वह भी केवल 26 दिनों का भुगतान होता है। महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें पूरे महीने का वेतन दिया जाए। निगम प्रशासन को छह सूत्री मांगों का ज्ञापन पहले ही सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रमुख मांगों में अष्टम वेतन अंतर राशि का भुगतान, सातवें वेतनमान को तत्काल लागू करना, NGO कर्मियों को कुशल एवं अति कुशल श्रेणी के अनुरूप वेतनमान देना और स्थायी कर्मचारियों को ACP का लाभ शामिल है। इसके अलावा अस्थायी कर्मियों को नियमित करने और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय लागू करने की भी मांग उठाई गई है।
निगम पर मनमानी का आरोप कर्मचारी बबीता देवी ने कहा कि ठेका प्रथा समाप्त कर सभी कर्मियों को स्थायी किया जाए, क्योंकि मामूली वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो चुका है। निगम प्रशासन मनमाने तरीके से कर्मचारियों को काम से हटाता है। बिना जांच और स्पष्टीकरण के कर्मियों को हटाने पर रोक लगाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। विभागीय बंदी और अवकाश के दिनों में काम लेने के बावजूद अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। गुरुवार को निगम कार्यालय में अधिकारियों के साथ वार्ता हुई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों ने मामला नगर विकास विभाग से जुड़ा बताते हुए असमर्थता जताई। वहीं कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आरा शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम कर्मियों ने अब अपने अधिकारों की लड़ाई को लेकर आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। वर्षों से लंबित वेतनमान, एरियर और सेवा लाभ की मांग को लेकर आरा नगर निगम के सफाई कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल का असर पहले ही दिन से शहर की सफाई व्यवस्था पर साफ दिखाई दिया। निगम के 45 वार्डों में कचरा उठाव पूरी तरह ठप हो गया। जिससे कई इलाकों में गंदगी फैल रही है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े का अंबार नजर आया। ताला बंद कर किया प्रदर्शन हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में सफाई कर्मी, वार्ड सुपरवाइजर, ड्राइवर और अन्य कर्मचारी नगर निगम कार्यालय पहुंचे, जहां मुख्य गेट में ताला बंद कर धरना-प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। आंदोलनकारी कर्मियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन और सेवा से जुड़े कई मुद्दे लंबित हैं, लेकिन निगम प्रशासन गंभीर पहल नहीं कर रहा है। पूरे महीने का वेतन मिलना चाहिए संघ की अध्यक्ष पुष्पा सिंह कुशवाहा ने बताया कि कर्मचारियों को मात्र 10,200 रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है। वह भी केवल 26 दिनों का भुगतान होता है। महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें पूरे महीने का वेतन दिया जाए। निगम प्रशासन को छह सूत्री मांगों का ज्ञापन पहले ही सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रमुख मांगों में अष्टम वेतन अंतर राशि का भुगतान, सातवें वेतनमान को तत्काल लागू करना, NGO कर्मियों को कुशल एवं अति कुशल श्रेणी के अनुरूप वेतनमान देना और स्थायी कर्मचारियों को ACP का लाभ शामिल है। इसके अलावा अस्थायी कर्मियों को नियमित करने और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय लागू करने की भी मांग उठाई गई है।
निगम पर मनमानी का आरोप कर्मचारी बबीता देवी ने कहा कि ठेका प्रथा समाप्त कर सभी कर्मियों को स्थायी किया जाए, क्योंकि मामूली वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो चुका है। निगम प्रशासन मनमाने तरीके से कर्मचारियों को काम से हटाता है। बिना जांच और स्पष्टीकरण के कर्मियों को हटाने पर रोक लगाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। विभागीय बंदी और अवकाश के दिनों में काम लेने के बावजूद अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। गुरुवार को निगम कार्यालय में अधिकारियों के साथ वार्ता हुई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों ने मामला नगर विकास विभाग से जुड़ा बताते हुए असमर्थता जताई। वहीं कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


