महासमुंद में कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर महंगाई, पेट्रोल-डीजल संकट और उर्वरक कमी को लेकर तीखा हमला बोला। वरिष्ठ नेता राजेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों से देश डीजल, पेट्रोल और गैस संकट से जूझ रहा है। बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की आर्थिक स्थिति खराब कर दी है। राजेंद्र तिवारी ने प्रधानमंत्री की अपीलों को “जख्मों पर नमक छिड़कने” जैसा बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री की अलग-अलग अपीलों का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को उर्वरक कम उपयोग करने, नौकरीपेशा लोगों को वर्क फ्रॉम होम अपनाने और महिलाओं को तेल-गैस कम इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की बात भी कही जा रही है। आम नागरिक पहले ही महंगाई और आर्थिक संकट से परेशान है। उनका आरोप है कि पिछले सात सालों से देश में उर्वरकों की कमी बनी हुई है। किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। उर्वरक संकट और किसानों की बढ़ती परेशानी किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन आज किसान महंगे दामों पर उर्वरक खरीदने और कर्ज लेने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ में करीब 15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत है, लेकिन अभी तक केवल 51 हजार मीट्रिक टन उर्वरक ही सोसायटियों तक पहुंच पाया है। ‘वर्क फ्रॉम होम’ सलाह को बताया मजाक राजेंद्र तिवारी ने कहा कि जरूरत पूरी करने के बजाय किसानों से उर्वरक का उपयोग कम करने की अपील की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री की ‘वर्क फ्रॉम होम’ सलाह को लाखों लोगों के साथ मजाक बताया। उन्होंने कहा कि यह सलाह उन लोगों के लिए बेकार है जो फील्ड में काम करते हैं, रेहड़ी-ठेला चलाते हैं, मजदूरी करते हैं या गली-मोहल्लों में सामान बेचकर परिवार चलाते हैं। रसोई का बजट बिगड़ने का दावा उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों की रसोई पूरी तरह प्रभावित कर दी है। खाद्य तेल, गैस, दाल, दूध, आटा और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना था कि महिलाएं पहले से ही घर के बजट में कटौती कर रही हैं, ऐसे में तेल और गैस कम उपयोग करने की सलाह देना वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़ना है। 2013 और 2026 की कीमतों की तुलना राजेंद्र तिवारी ने कहा कि ने साल 2013 और 2026 के बीच आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की तुलना भी पेश की। आटा 210 रुपए से बढ़कर 530 रुपए प्रति 10 किलो, रसोई गैस 410 रुपए से बढ़कर लगभग 1000 रुपए, पेट्रोल 66 रुपए से बढ़कर 100 रुपए प्रति लीटर और डीजल 52 रुपए से बढ़कर 95 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि सरसों तेल 52 रुपए से बढ़कर 260 रुपए और अरहर दाल 70-80 रुपए से बढ़कर 160-170 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसके अलावा दवाइयों और साबुन जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में भी बड़ी वृद्धि हुई है। सोने की कीमतों पर भी निशाना साल 2013 में सोने की कीमत लगभग 28 से 29 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम थी, जबकि अब यह डेढ़ लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गई है। उनका आरोप है कि सरकार की आर्थिक नीतियों से आम लोगों की बचत और खरीद क्षमता प्रभावित हुई है। पेट्रोलियम टैक्स पर आरोप राजेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी टैक्स लगाकर जनता से लाखों करोड़ रुपये वसूले हैं। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम ऊंचे बने हुए हैं। छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों, खासकर सरगुजा क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की कमी बनी हुई है। कमर्शियल गैस की कमी से छोटे और मध्यम उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। विदेश यात्राओं पर भी उठाए सवाल उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और सरकारी खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि एक तरफ जनता को खर्च कम करने की सलाह दी जा रही है, दूसरी तरफ विदेश यात्राओं और विशेष विमानों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। मध्यम वर्ग पर आर्थिक दबाव राजेंद्र तिवारी ने कहा कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, जीएसटी, टोल टैक्स और महंगी रेल यात्रा के कारण मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग आर्थिक दबाव में है। परिवारों को घर चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि हालिया सर्वे में बड़ी संख्या में परिवारों की बचत घटने और कर्ज बढ़ने की बात सामने आई है। राजनीतिक बयानबाजी का आरोप उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपने संबोधनों में जनहित के मुद्दों की बजाय कांग्रेस का नाम लेकर राजनीतिक हमला ज्यादा करते हैं। उनका कहना था कि देश आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और ईंधन संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार मूल समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में लगी हुई है।


