एक लाइसेंस पर 100 किलो ड्यूटी फ्री Gold ही आयात कर पाएंगे ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स, जानिए सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

एक लाइसेंस पर 100 किलो ड्यूटी फ्री Gold ही आयात कर पाएंगे ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स, जानिए सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

DGFT New Guidelines: भारत सरकार ने देश के बढ़ते आयात बिल (Import Bill) को रोकने और सोने के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यातकों के लिए ड्यूटी-फ्री सोना आयात करने के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। यह फैसला सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के बाद लिया गया है।

क्या हैं नए नियम?

नए नियमों के तहत अब ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ (AA) स्कीम में जूलरी एक्सपोर्टर्स एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही आयात कर सकेंगे। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ड्यूटी-फ्री आयात किया गया सोना वास्तव में ज्वेलरी बनाकर एक्सपोर्ट में ही इस्तेमाल हो, उसका गलत इस्तेमाल या घरेलू बाजार में बिक्री न हो। इसमें पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पांच नए अनुपालन नोट्स (compliance notes) जारी किए हैं, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

पहली बार आवेदन करने वालों के लिए सख्ती

जो ज्वेलर्स पहली बार ड्यूटी-फ्री सोने के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनके कारखानों का अब फिजिकल वेरिफिकेशन यानी की मौके पर जाकर जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है। क्षेत्रीय अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि यूनिट वास्तव में मौजूद है और वहां काम करने की क्षमता है या नहीं।

इसके साथ ही पुराने निर्यातकों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। अब किसी भी निर्यातक को सोने का अगला कोटा तभी मिलेगा, जब उसने अपने पिछले ऑर्डर का कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात पूरा कर लिया हो। इससे पुराने पेंडिंग काम को जल्द खत्म करने का दबाव बढ़ेगा।

हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

पारदर्शिता के लिए अब निर्यातकों को हर 15 दिन में एक परफॉर्मेंस रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट को किसी स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से प्रमाणित करवाना जरूरी होगा। इसमें सोने के आयात और उससे बने आभूषणों के निर्यात का पूरा हिसाब देना होगा।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

साल 2025-26 में भारत का सोना आयात 24 फीसदी बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, वजन के हिसाब से आयात कम हुआ, लेकिन कीमतों में उछाल ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाला। भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड (40%), यूएई (16%) और दक्षिण अफ्रीका (10%) से खरीदता है। हालांकि, ज्वेलरी इंडस्ट्री ने इस फैसले पर चिंता जताई है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल का कहना है कि ड्यूटी बढ़ने से स्मगलिंग और ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिल सकता है।

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