बहराइच में AIMIM प्रदेश अध्यक्ष का विवादित बयान, सुहेलदेव की जाति पर उठाए सवाल, 2027 चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान

बहराइच में AIMIM प्रदेश अध्यक्ष का विवादित बयान, सुहेलदेव की जाति पर उठाए सवाल, 2027 चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान

बहराइच में दरगाह शरीफ पहुंचे AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने महाराजा सुहेलदेव की जाति पर बयान देकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने ओम प्रकाश राजभर से सवाल किया कि आखिर सुहेलदेव किस समाज से थे। इसको लेकर सच सामने आना चाहिए। दरगाह पर चादरपोशी के दौरान शौकत अली ने 2027 विधानसभा चुनाव में बहराइच की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया।

बहराइच में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। दरगाह शरीफ पहुंचे शौकत अली ने महाराजा सुहेलदेव की जाति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर जनता के सामने सच्चाई आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश राजभर स्पष्ट करें कि महाराजा सुहेलदेव राजभर समाज से जुड़े थे। या पासी समाज से। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।

बहराइच की सातों विधानसभा सीटों पर 2027 में AIMIM उतारेगी अपने प्रत्याशी

दरअसल, शौकत अली बहराइच स्थित प्रसिद्ध दरगाह शरीफ पहुंचे थे। यहां उन्होंने हजरत सय्यद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर चादर चढ़ाकर अकीदत पेश की। इस दौरान बड़ी संख्या में AIMIM समर्थक भी मौजूद रहे। मीडिया से बातचीत करते हुए शौकत अली ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि AIMIM उत्तर प्रदेश में मजबूती से चुनाव मैदान में उतरेगी। बहराइच जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी।

बहराइच से एक भी विधायक जीता, तो दरगाह मेला लगने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक पाएगी

उन्होंने यह भी कहा कि यदि AIMIM का बहराइच से एक भी विधायक जीत गया। तो दरगाह मेला लगने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक पाएगी। उनके मुताबिक यह मेला आपसी भाईचारे और आस्था का प्रतीक है। जिसे रोकने की कोशिश किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दी जाएगी। शौकत अली के बयान के बाद जहां AIMIM कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। वहीं विरोधी दलों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने की तैयारी शुरू कर दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुहेलदेव की पहचान और जातीय राजनीति को लेकर दिया गया यह बयान आने वाले समय में पूर्वांचल और तराई क्षेत्र की राजनीति में नया मुद्दा बन सकता है।

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