जमुई शहर में मानसून से पहले हुई हल्की बारिश ने नगर परिषद और संबंधित विभागों की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। कुछ ही मिनटों की बारिश के बाद शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर भारी जलजमाव हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। कई इलाकों में लोगों को घुटनों तक पानी से गुजरना पड़ा, वहीं दोपहिया वाहन चालक जोखिम उठाकर सफर करते दिखे। महाराजगंज चौक, महीसौढ़ी, पंच मंदिर और अस्पताल मार्ग सहित कई प्रमुख बाजार क्षेत्रों और आवासीय मोहल्लों में जलजमाव के कारण लंबा जाम लग गया। दुकानदारों ने बताया कि सड़कों पर पानी भर जाने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे उनके व्यापार पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। बारिश में ये सभी दावे खोखले साबित हुए
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से नाला निर्माण, सड़क मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के नाम पर बड़े पैमाने पर कार्य कराए गए थे। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने दावा किया था कि इन योजनाओं से बरसात में राहत मिलेगी, लेकिन पहली ही बारिश में ये सभी दावे खोखले साबित हुए। कई स्थानों पर नालों में पानी का बहाव नहीं दिखा, जबकि कुछ जगहों पर नाले कचरे और मिट्टी से भरे मिले। लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की गंभीर कमी रही है और बिना समुचित निगरानी के कार्यों को पूरा दिखाकर सरकारी राशि खर्च कर दी गई। जलजमाव वाले क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि अधिकांश जगहों पर नाले सड़क से ऊंचे बना दिए गए हैं, जिससे बारिश का पानी नाले में जाने के बजाय सड़क पर ही जमा हो जाता है। शहरवासियों ने नगर परिषद और जिला प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने और जलजमाव वाले क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की है। जमुई शहर में मानसून से पहले हुई हल्की बारिश ने नगर परिषद और संबंधित विभागों की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। कुछ ही मिनटों की बारिश के बाद शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर भारी जलजमाव हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। कई इलाकों में लोगों को घुटनों तक पानी से गुजरना पड़ा, वहीं दोपहिया वाहन चालक जोखिम उठाकर सफर करते दिखे। महाराजगंज चौक, महीसौढ़ी, पंच मंदिर और अस्पताल मार्ग सहित कई प्रमुख बाजार क्षेत्रों और आवासीय मोहल्लों में जलजमाव के कारण लंबा जाम लग गया। दुकानदारों ने बताया कि सड़कों पर पानी भर जाने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे उनके व्यापार पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। बारिश में ये सभी दावे खोखले साबित हुए
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से नाला निर्माण, सड़क मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के नाम पर बड़े पैमाने पर कार्य कराए गए थे। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने दावा किया था कि इन योजनाओं से बरसात में राहत मिलेगी, लेकिन पहली ही बारिश में ये सभी दावे खोखले साबित हुए। कई स्थानों पर नालों में पानी का बहाव नहीं दिखा, जबकि कुछ जगहों पर नाले कचरे और मिट्टी से भरे मिले। लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की गंभीर कमी रही है और बिना समुचित निगरानी के कार्यों को पूरा दिखाकर सरकारी राशि खर्च कर दी गई। जलजमाव वाले क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि अधिकांश जगहों पर नाले सड़क से ऊंचे बना दिए गए हैं, जिससे बारिश का पानी नाले में जाने के बजाय सड़क पर ही जमा हो जाता है। शहरवासियों ने नगर परिषद और जिला प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने और जलजमाव वाले क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की है।


