गुरदासपुर के युवक की रूस में मौत:9 महीने बाद रूसी झंडे में लिपटा गांव बोहजा पहुंचा शव, डीएनए फीस के लिए बेचना पड़ा घर, धोखे से किया रशियन आर्मी में भर्ती

गुरदासपुर के युवक की रूस में मौत:9 महीने बाद रूसी झंडे में लिपटा गांव बोहजा पहुंचा शव, डीएनए फीस के लिए बेचना पड़ा घर, धोखे से किया रशियन आर्मी में भर्ती

परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए वर्क परमिट पर जर्मनी गए हलका श्री हरगोबिंदपुर के गांव बोहजा के युवक गुरसेवक सिंह की मौत की खबर से इलाके में शोक और दुख की लहर दौड़ गई है। परिवार ने गुरसेवक सिंह को जर्मनी भेजने के लिए परिजनों और पहचान वालों से कर्ज लिया था।
हालांकि गुरसेवक सिंह रूसी सेना में भर्ती कैसे हुआ अभी तक परिवार के लिए रहस्य बना हुआ है। परिवार के हालात इतने खराब हैं कि बेटे के शव की पहचान करने के लिए डीएनए टेस्ट की फीस अपना घर बेच कर चुकानी पड़ी थी। 2025 की शुरूआत में वर्क परमिट पर जर्मन गया था
गुरबाज सिंह ने बताया कि उसका भाई गुरसेवक 2025 की शुरूआत में वर्क परमिट पर जर्मन गया था। लेकिन पता नहीं कैसे वह वहां से किसी एजेंट के माध्यम से रूस की फौज में भर्ती हो गया। गुरसेवक सिंह के साथ आखरी बार सितंबर में वीडियो कॉल पर बात हुई थी। गुरसेवक सिंह को रूसी फौज में यह कह कर भर्ती किया गया था कि उसे फौजी कैंप में तैनात किया जाएगा। लेकिन उसे पता नहीं था कि लड़ाई की आग में गुरसेवक को झोंक दिया जाएगा। लेकिन सितंबर 2025 के बाद से गुरसेवक से कोई संपर्क नहीं हो पाया। पंजाब और केंद्र सरकार को कई पत्र लिखे
परिवार की तरफ से गुरसेवक सिंह की खोज खबर के लिए पंजाब और केंद्र सरकार को कई पत्र लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं आया और न ही गुरसेवक का पता चला। करीब पच्चीस दिन पहले परिवार को भारत सरकार की तरफ से जानकारी मिली कि उनके बेटे की मौत रूसी सेना में हुई है और उसकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट भेजना होगा। शुक्रवार को गुरसेवक का शव दिल्ली पहुंचा
गुरबाज सिंह ने बताया की शुक्रवार को प्रशासन की तरफ से पता चला कि गुरसेवक सिंह का शव दिल्ली पहुंच चुका है। जिसके बाद परिवार उसके पार्थिव शरीर को गांव बोजा लाया गया । रूसी सेना की तरफ से गुरसेवक की अंतिम विदाई सैन्य सम्मान के साथ की गई थी। रूसी सरकार द्वारा डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया है। शनिवार देर शाम को गमगीन माहौल में गुरसेवक सिंह का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में कर दिया गया। आर्थिक सहायता का मांग
वहीं गांव वासियों और परिजनों ने पंजाब सरकार व केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा है कि गुरसेवक सिंह के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का गुजारा चल सके। घर बेच कर भेजा डीएनए
गुरसेवक सिंह की मौत रूसी जंग के दौरान कैसे हुई अभी तक परिवार को जानकारी नहीं है। परिवार के बुरे आर्थिक हालात खुद बयां कर रहे हैं कि जब रशियन फौज की तरफ से मृतक के परिजनों से डीएनए टेस्ट मांगा था तो परिवार के पास टेस्ट के लिए रुपये चाहिए थे। अपने बेटे की मृतक देह मंगवाने के लिए परिवार ने अपना घर बेच कर डीएनए टेस्ट करवा कर भेजना पड़ा। जिसके बाद जिस दौरान परिवार का डीएनए टेस्ट कर पहचान हो पाई थी। जिस कारण गुरसेवक का शव देरी से पहुंचा।

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