गया व्यवहार न्यायालय व शेरघाटी कोर्ट परिसर में आज साल की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगी, तो बड़ी संख्या में लोगों को लंबी कानूनी लड़ाई से राहत मिली। एक ही दिन में 3304 मामलों का निष्पादन हुआ। कुल 9 करोड़ 67 लाख 67 हजार 313 रुपए की समझौता राशि तय हुई। यानी अदालत में सिर्फ केस नहीं निपटे, बल्कि हजारों परिवारों की टेंशन भी दूर हो गई। हालांकि ट्रैफिक चालान से जुड़े मामले के निपटारे के लिए लोगों की भीड़ अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, जबकि जिला प्रशासन व लोक अदालत की ओर से काफी प्रचार प्रसार किया गया था। लोक अदालत में दोनों पक्षों की जीत होती कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष प्रदीप कुमार मलिक, जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर, परिवार न्यायाधीश सुनील कुमार वर्मा, डीएएसजे-1 शशिकांत ओझा और सचिव अरविंद कुमार दास ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। उद्घाटन के दौरान प्रधान जिला जज प्रदीप कुमार मलिक ने साफ कहा कि लोक अदालत ही वह मंच है जहां दोनों पक्षों की जीत होती है। यहां कोई हारता नहीं। आपसी सहमति बनती है। रिश्ते बचते हैं। उन्होंने सभी न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं और सहयोगी कर्मियों की सराहना की। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कुल 27 बेंच बनाई गई थीं। इनमें गया में 23 और शेरघाटी में 4 बेंच शामिल रहीं। हर बेंच पर न्यायिक पदाधिकारी और पैनल अधिवक्ता की टीम ने तेजी से मामलों की सुनवाई कर समझौते कराए। सबसे ज्यादा बिजली विभाग के 1007 मामलों का निपटारा हुआ। इसमें 3 करोड़ 86 लाख 25 हजार 836 रुपए का समझौता हुआ। क्रिमिनल कंपाउंडेबल मामलों की संख्या 1531 रही, जिनमें 19 लाख 20 हजार 235 रुपए का निपटारा हुआ। बैंक से जुड़े 530 मामलों में 2 करोड़ 98 लाख 33 हजार 756 रुपए का समझौता हुआ। मोटर वाहन दुर्घटना के 27 मामलों में 2 करोड़ 58 लाख 75 हजार रुपए का समझौता हुआ। यह आंकड़ा पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। ट्रैफिक चालान के 205 मामलों का भी मौके पर निपटारा किया गया, जिससे 5 लाख 9 हजार 500 रुपए की राशि तय हुई। इसके अलावा चेक बाउंस और बीएसएनएल से जुड़े मामलों का भी समाधान हुआ। गया व्यवहार न्यायालय व शेरघाटी कोर्ट परिसर में आज साल की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगी, तो बड़ी संख्या में लोगों को लंबी कानूनी लड़ाई से राहत मिली। एक ही दिन में 3304 मामलों का निष्पादन हुआ। कुल 9 करोड़ 67 लाख 67 हजार 313 रुपए की समझौता राशि तय हुई। यानी अदालत में सिर्फ केस नहीं निपटे, बल्कि हजारों परिवारों की टेंशन भी दूर हो गई। हालांकि ट्रैफिक चालान से जुड़े मामले के निपटारे के लिए लोगों की भीड़ अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, जबकि जिला प्रशासन व लोक अदालत की ओर से काफी प्रचार प्रसार किया गया था। लोक अदालत में दोनों पक्षों की जीत होती कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष प्रदीप कुमार मलिक, जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर, परिवार न्यायाधीश सुनील कुमार वर्मा, डीएएसजे-1 शशिकांत ओझा और सचिव अरविंद कुमार दास ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। उद्घाटन के दौरान प्रधान जिला जज प्रदीप कुमार मलिक ने साफ कहा कि लोक अदालत ही वह मंच है जहां दोनों पक्षों की जीत होती है। यहां कोई हारता नहीं। आपसी सहमति बनती है। रिश्ते बचते हैं। उन्होंने सभी न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं और सहयोगी कर्मियों की सराहना की। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कुल 27 बेंच बनाई गई थीं। इनमें गया में 23 और शेरघाटी में 4 बेंच शामिल रहीं। हर बेंच पर न्यायिक पदाधिकारी और पैनल अधिवक्ता की टीम ने तेजी से मामलों की सुनवाई कर समझौते कराए। सबसे ज्यादा बिजली विभाग के 1007 मामलों का निपटारा हुआ। इसमें 3 करोड़ 86 लाख 25 हजार 836 रुपए का समझौता हुआ। क्रिमिनल कंपाउंडेबल मामलों की संख्या 1531 रही, जिनमें 19 लाख 20 हजार 235 रुपए का निपटारा हुआ। बैंक से जुड़े 530 मामलों में 2 करोड़ 98 लाख 33 हजार 756 रुपए का समझौता हुआ। मोटर वाहन दुर्घटना के 27 मामलों में 2 करोड़ 58 लाख 75 हजार रुपए का समझौता हुआ। यह आंकड़ा पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। ट्रैफिक चालान के 205 मामलों का भी मौके पर निपटारा किया गया, जिससे 5 लाख 9 हजार 500 रुपए की राशि तय हुई। इसके अलावा चेक बाउंस और बीएसएनएल से जुड़े मामलों का भी समाधान हुआ।


