कोंडागांव में 7 मई को बेमौसम बारिश के कारण तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश से जंगलों में सूखने के लिए रखी हजारों गड्डियां भीग गई हैं, जिससे शासन को लाखों रुपए का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, संग्राहकों को इसका सीधा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि उन्हें तय दर पर भुगतान किया जा रहा है। दो साल पहले तक तेन्दूपत्ता खरीदी ठेकेदारों के माध्यम से होती थी, लेकिन अब यह कार्य शासन स्वयं कर रहा है। वर्तमान में एक मानक बोरा तेन्दूपत्ता 5500 रुपए में खरीदा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग अपने पूरे परिवार के साथ जंगलों में जाकर पत्ते तोड़ने, गड्डियां बनाने और उन्हें सुखाने का काम करते हैं, जिसे वे ‘हरा सोना’ मानते हैं। बारिश में भीगीं हजारों तेन्दूपत्ता गड्डियां सुबह से शाम तक की मेहनत से तैयार की गई ये गड्डियां खुले मैदानों में सुखाई जाती हैं। मुलमुला रेंज सहित आसपास के कई इलाकों में हजारों गड्डियां बारिश में भीग चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार भीगने के बाद तेन्दूपत्तों को पूरी तरह सुखाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनमें सड़न शुरू हो सकती है और गुणवत्ता प्रभावित होती है। सरकारी तंत्र पर बढ़ा नुकसान का असर इस बार नुकसान का सबसे बड़ा असर शासन पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीदी की जिम्मेदारी अब सरकारी तंत्र के पास है। तेन्दूपत्ता खरीदी कार्य को संभालने के लिए सचिव, रोजगार सहायक, फड़ मुंशी, अधिकारी और वन अमले सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी लगाए गए हैं। केवल कोंडागांव वनमंडल में ही करीब 700 कर्मचारी इस कार्य में तैनात हैं। वन विभाग बोला- भीगे पत्तों को सुखाने की कोशिश जारी वनमंडलाधिकारी चुनामणि सिंह ने बताया कि इस वर्ष कोंडागांव वनमंडल में 19 हजार 500 मानक बोरा तेन्दूपत्ता खरीदी का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक लगभग 50 प्रतिशत खरीदी हो चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि बारिश के कारण पत्तों को सुरक्षित रखने में दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन वन अमला भीगे पत्तों को दोबारा सुखाने का प्रयास कर रहा है।


