शाहजहांपुर में व्यापारियों ने किया विरोध प्रदर्शन:कमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़े दाम पर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया

शाहजहांपुर में व्यापारियों ने किया विरोध प्रदर्शन:कमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़े दाम पर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया

शाहजहांपुर में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़े दामों के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर कहा कि सभी तरह के उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं। पदाधिकारियों ने मांग की है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग घरेलू गैस सिलेंडर की तरह ऑनलाइन की जाए। उन्होंने बताया कि व्यवसायिक गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता के कारण कुटीर, घरेलू और मझौले उद्योगों के साथ-साथ होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, कैटरिंग, हवाई, डेयरी और फेरी वाले व्यापारियों का कारोबार ठप होने की कगार पर है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जिला अध्यक्ष सौमित्र गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 2026 से कमर्शियल गैस का रेट 2080 रुपए से बढ़ाकर 3171 रुपए प्रति सिलेंडर कर दिया गया है। उन्होंने मांग की कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आवश्यकतानुसार उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और इसकी बुकिंग घरेलू गैस सिलेंडर की भांति ऑनलाइन करने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से गैस के वैकल्पिक संसाधनों की खोज के लिए एक अनुसंधान कमेटी गठित करने का भी आग्रह किया। महानगर अध्यक्ष मोहम्मद सलाउद्दीन अख्तर ने कहा कि महंगाई और कालाबाजारी को रोकने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ाई गई दरें तुरंत वापस ली जाएं। उन्होंने केंद्र सरकार को निर्देशित करने की मांग की कि विवाह, शादी और अन्य आयोजनों के लिए मांग के अनुसार सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, अस्पतालों और स्कूलों को भी उनकी आवश्यकतानुसार कमर्शियल गैस उपलब्ध कराई जाए। अख्तर ने यह भी कहा कि गोदाम से गैस डिलीवरी लेने पर कंपनियों द्वारा एजेंसी को दिए गए भाड़े को कमर्शियल गैस सिलेंडर के बिलों में कम करने के आदेश पारित किए जाएं, ताकि इसका लाभ उपभोक्ता को मिल सके। उन्होंने महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर पर जीएसटी की दरें 18 प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, कमर्शियल गैस की कमी होने पर उद्योगों को पुराने वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने की अनुमति दी जाए और इसके लिए पॉल्यूशन विभाग व एनजीटी के नियमों में 5 साल की छूट प्रदान की जाए।

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