राजस्थान: हरी सांगरी 250 तो सूखी 2500 रुपए तक बिक रही, इसलिए है लोगों की पहली पसंद

राजस्थान: हरी सांगरी 250 तो सूखी 2500 रुपए तक बिक रही, इसलिए है लोगों की पहली पसंद

अजमेर जिले के रूपनगढ़ क्षेत्र में इन दिनों राज्य वृक्ष खेजड़ी पर सांगरी की बहार देखने को मिल रही है। खेतों में खेजड़ी के पेड़ों पर लगी सांगरी को ग्रामीण तोड़कर बाजार में बिक्री के लिए ला रहे हैं, वहीं घरों में सब्जी और अचार बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जा रहा है। पारंपरिक तरीके से कच्ची सांगरी को डालियों से तोड़कर घर लाया जाता है, जहां इसे साफ पानी से धोकर उबाला जाता है और फिर छाया में सुखाकर पूरे वर्ष उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है।

कीमतों में तेजी, मेहनत भी ज्यादा

इन दिनों हरी सांगरी 200 से 250 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है, जबकि सूखने के बाद इसकी कीमत 2000 से 2500 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है। सांगरी तोड़ने और बीनने का काम आसान नहीं होता। खेजड़ी के पेड़ों के कांटे हाथों में चुभते हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। परंपरागत रूप से यह कार्य चरवाहे और कृषक समुदाय के लोग अधिक करते हैं।

पूरी तरह प्राकृतिक, इसलिए पहली पसंद

खेजड़ी के वृक्ष पर लगने वाली सांगरी बिना किसी रासायनिक दवाई और मिलावट के पूरी तरह प्राकृतिक होती है। यही कारण है कि यह लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। राजस्थान के कई जिलों में इसकी अच्छी पैदावार और खपत होती है।

जायकेदार सब्जी का खास स्वाद

हरी और सूखी दोनों तरह की सांगरी की सब्जी बेहद स्वादिष्ट मानी जाती है। इसे बनाने के लिए सांगरी को धोकर उबाला जाता है, फिर दही और मसालों के साथ घी या तेल में छौंक लगाया जाता है। कई जगहों पर इसे अंगूर (दाख) के साथ मिलाकर भी बनाया जाता है, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देता है।

बेमौसम बारिश ने घटाया उत्पादन

इस वर्ष सांगरी की पैदावार अपेक्षाकृत कम रही है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फल झड़ गए, जिससे पेड़ों पर सांगरी कम लगी है। इसका असर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर भी साफ देखा जा रहा है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *