झारखंड कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ‘एक को साधिए, झारखंड में सब सध जाएगा’ जैसे तीखे बयान के साथ प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने प्रदेश प्रभारी के. राजू को पत्र लिखकर संगठन की दिशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है। इस बयान और पत्र के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसे नेतृत्व के खिलाफ खुली नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। संगठन विस्तार पर उठाए सवाल, जन मुद्दों से दूरी का आरोप राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि केवल संगठन का आकार बढ़ाने से पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश कमेटी के सदस्यों की संख्या 314 से बढ़ाकर 628 भी कर दी जाए, तब भी कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। यदि पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएगी। उनका कहना है कि प्रदेश कांग्रेस स्थानीय और संवेदनशील मुद्दों पर लगातार मौन बनी हुई है। यह पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। जेटेट और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर चुप्पी पर सवाल किशोर ने जेटेट परीक्षा से भोजपुरी और मगही भाषा हटाने के फैसले, हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग से दुष्कर्म और तीन अल्पसंख्यकों की हत्या जैसे मामलों पर प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी को समझ से परे बताया। उन्होंने कहा कि पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद और बोकारो जैसे जिलों में इन भाषाओं का व्यापक उपयोग होता है, इसके बावजूद इसे बड़ा जनमुद्दा नहीं बनाया गया। उनका आरोप है कि इन गंभीर घटनाओं पर पार्टी की सक्रियता जमीन पर नजर नहीं आई। प्रतिनिधित्व और परिवारवाद पर भी उठे सवाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन को लेकर भी राधाकृष्ण किशोर ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि 314 सदस्यीय कमेटी में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने संगठन में नेताओं के परिवारों को मिले स्थान पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि पारदर्शिता और संतुलित प्रतिनिधित्व के बिना संगठन मजबूत नहीं हो सकता। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो से सीधी बात महिला आरक्षण मुद्दा नहीं बन सका? -प्रदेश कांग्रेस ने शुरू से ही इसे मुद्दा बनाया। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, रमा खलखो, प्रदीप यादव समेत कई नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। महिला कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकाला और प्रमंडल स्तर पर कार्यक्रम चल रहे हैं। जेटेट से मगही और भोजपुरी भाषा हटाने का विरोध क्यों नहीं किया गया? – यह कैबिनेट का मामला था। जिस दिन जेटेट का प्रस्ताव पारित हुआ, उसी दिन मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विरोध किया था। प्रदेश अध्यक्ष अकेले फैसला नहीं लेते, यह विषय पीएसी की बैठक में उठाया जाना चाहिए था। अनुसूचित जाति आयोग पर चुप्पी क्यों? -प्रदेश कांग्रेस ने ओबीसी के लिए अलग मंत्रालय बनाने और अनुसूचित जाति परामर्शदात्री समिति व आयोग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। हजारीबाग की घटनाओं पर पार्टी निष्क्रिय थी? – विष्णुगढ़ में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, रमा खलखो और महिला टीम गई थी। तीन अल्पसंख्यकों की हत्या के मामले में विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप के नेतृत्व में टीम भेजी गई थी। राधाकृष्ण लगातार सवाल उठा रहे हैं? – राधाकृष्ण किशोर को पूरा सम्मान दिया है। उन्हें अपनी बात पार्टी फोरम या वरिष्ठ नेताओं के समक्ष रखनी चाहिए। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं थी। झारखंड कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ‘एक को साधिए, झारखंड में सब सध जाएगा’ जैसे तीखे बयान के साथ प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने प्रदेश प्रभारी के. राजू को पत्र लिखकर संगठन की दिशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है। इस बयान और पत्र के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसे नेतृत्व के खिलाफ खुली नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। संगठन विस्तार पर उठाए सवाल, जन मुद्दों से दूरी का आरोप राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि केवल संगठन का आकार बढ़ाने से पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश कमेटी के सदस्यों की संख्या 314 से बढ़ाकर 628 भी कर दी जाए, तब भी कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। यदि पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएगी। उनका कहना है कि प्रदेश कांग्रेस स्थानीय और संवेदनशील मुद्दों पर लगातार मौन बनी हुई है। यह पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। जेटेट और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर चुप्पी पर सवाल किशोर ने जेटेट परीक्षा से भोजपुरी और मगही भाषा हटाने के फैसले, हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग से दुष्कर्म और तीन अल्पसंख्यकों की हत्या जैसे मामलों पर प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी को समझ से परे बताया। उन्होंने कहा कि पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद और बोकारो जैसे जिलों में इन भाषाओं का व्यापक उपयोग होता है, इसके बावजूद इसे बड़ा जनमुद्दा नहीं बनाया गया। उनका आरोप है कि इन गंभीर घटनाओं पर पार्टी की सक्रियता जमीन पर नजर नहीं आई। प्रतिनिधित्व और परिवारवाद पर भी उठे सवाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन को लेकर भी राधाकृष्ण किशोर ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि 314 सदस्यीय कमेटी में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने संगठन में नेताओं के परिवारों को मिले स्थान पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि पारदर्शिता और संतुलित प्रतिनिधित्व के बिना संगठन मजबूत नहीं हो सकता। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो से सीधी बात महिला आरक्षण मुद्दा नहीं बन सका? -प्रदेश कांग्रेस ने शुरू से ही इसे मुद्दा बनाया। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, रमा खलखो, प्रदीप यादव समेत कई नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। महिला कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकाला और प्रमंडल स्तर पर कार्यक्रम चल रहे हैं। जेटेट से मगही और भोजपुरी भाषा हटाने का विरोध क्यों नहीं किया गया? – यह कैबिनेट का मामला था। जिस दिन जेटेट का प्रस्ताव पारित हुआ, उसी दिन मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विरोध किया था। प्रदेश अध्यक्ष अकेले फैसला नहीं लेते, यह विषय पीएसी की बैठक में उठाया जाना चाहिए था। अनुसूचित जाति आयोग पर चुप्पी क्यों? -प्रदेश कांग्रेस ने ओबीसी के लिए अलग मंत्रालय बनाने और अनुसूचित जाति परामर्शदात्री समिति व आयोग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। हजारीबाग की घटनाओं पर पार्टी निष्क्रिय थी? – विष्णुगढ़ में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, रमा खलखो और महिला टीम गई थी। तीन अल्पसंख्यकों की हत्या के मामले में विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप के नेतृत्व में टीम भेजी गई थी। राधाकृष्ण लगातार सवाल उठा रहे हैं? – राधाकृष्ण किशोर को पूरा सम्मान दिया है। उन्हें अपनी बात पार्टी फोरम या वरिष्ठ नेताओं के समक्ष रखनी चाहिए। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं थी।


