Geopolitics: खाड़ी देशों में तनाव अब तक के अपने सबसे चरम बिंदु पर पहुंच गया है। यह वैश्विक भू-राजनीति का सबसे नाजुक मोड़ है। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर खुली धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमले के बाद यह विवाद अचानक गहरा गया है। पूरी दुनिया इस घटनाक्रम से सकते में है, क्योंकि यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल व्यापार की सबसे बड़ी जीवन रेखा माना जाता है।
तेल के खेल में फंसा दुनिया का परिवहन
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह संकरा लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग एक तिहाई कच्चा तेल गुजरता है। ईरान ने सख्त लहजे में धमकी दी है कि अगर उस पर किसी भी तरह का पश्चिमी सैन्य या आर्थिक दबाव डाला गया, तो वह इस जलमार्ग को पूरी तरह से ब्लॉक कर देगा। वहीं, महाशक्ति अमेरिका ने भी पलटवार करते हुए साफ कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। अमेरिकी नौसेना ने इस क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की गश्त बढ़ा दी है, जिससे समंदर में सीधी सैन्य भिड़ंत का खतरा पैदा हो गया है।
UAE पर हमले से भड़का वैश्विक आक्रोश
इस पूरे विवाद में आग में घी डालने का काम यूएई के बुनियादी ढांचे पर हुए हमले ने किया है। इस हमले की संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा की गई है। अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों ने इसे क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा और स्पष्ट खतरा बताया है। अमेरिका ने अपने पुराने सहयोगी यूएई की रक्षा के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है और कड़ी चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी उकसावे वाले हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
ईरान का आक्रामक रुख और अमेरिका की घेरेबंदी
दूसरी ओर, ईरान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को जायज ठहराने के लिए बहाने ढूंढ रहा है। ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना ने उनके राष्ट्रीय हितों को मामूली सा भी नुकसान पहुंचाया, तो इसका अंजाम पूरे मध्य पूर्व के लिए बहुत विनाशकारी होगा। दोनों देशों की इस तीखी बयानबाजी ने कूटनीतिक शांति के सभी रास्तों को फिलहाल बंद कर दिया है।
दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर
इस पूरे भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है। अगर कुछ दिनों के लिए भी होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो सकती है। महंगाई का यह बम भारत जैसे विकासशील देशों पर सबसे भारी पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं।
यूएन ने दोनों देशों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों देशों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। यूरोपीय संघ ने मध्यस्थता की पेशकश करते हुए कहा है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। वहीं, अरब लीग ने यूएई के साथ पूर्ण एकजुटता दिखाई है। इस तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई जा सकती है। इसके अलावा, वैश्विक तेल कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदलने और सुरक्षा बीमा की समीक्षा करना शुरू कर दिया है।
भारत के लिए बहुत चिंताजनक हालात
बहरहाल, भारत के लिए यह स्थिति दोहरी चिंता का विषय है। पहला, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, जिससे महंगाई आसमान छुएगी। दूसरा, यूएई और खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कामगार रहते हैं, युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा और वापसी भारत सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन जाएगी।


