मध्यप्रदेश सरकार डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए मेडिकल सीटें बढ़ाने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 1234 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया है। एमबीबीएस की 700 और पीजी की 1073 सीटें बढ़ाने की योजना है, जिसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को प्रस्ताव भेजा गया है। एनएमसी ने ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन-2023 में संशोधन कर एमबीबीएस सीटों की अधिकतम 150 सीटों की सीमा समाप्त कर दी है। अब मेडिकल कॉलेज अपनी क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर सीटें बढ़ा सकते हैं। जिन मेडिकल कॉलेजों में 150 सीटें हैं, वहां 250 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जबकि जहां 100 सीटें हैं वहां 50 और जहां 180 सीटें हैं वहां 20-20 सीटें बढ़ाई जाएंगी। इसमें रीवा, सतना और सागर में सबसे ज्यादा 100-100 सीटें बढ़ाने की योजना है, जबकि ग्वालियर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंदसौर और शहडोल में 50-50 सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है। रतलाम और विदिशा में 20-20 सीटें बढ़ाई जाएंगी। पहले 10 लाख आबादी पर 100 एमबीबीएस सीटों का प्रावधान था, जिसे समाप्त कर दिया गया है। अब सीटों का संबंध आबादी से नहीं रहेगा। इधर, पोस्ट ग्रेजुएशन में 1073 सीटें बढ़ाने की तैयारी है। इसमें 823 नई सीटों के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है, जबकि 2019 में एनएमसी ने करीब 250 सीटों के लिए 375 करोड़ रुपए दिए थे, जिनका इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरण तैयार हैं और अब सीटों की मंजूरी का इंतजार है। पीजी में सबसे ज्यादा 120 सीटें एमडी मेडिसिन में बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा पीडियाट्रिक, गायनिक और एनेस्थिसिया में 80-80 सीटें तथा रेडियोडायग्नोसिस और आर्थो में 50-60 सीटें बढ़ाने की योजना है।
जिलों के हिसाब से सतना, सागर और विदिशा में 60-65 सीटें, भोपाल में 50 सीटें और ग्वालियर, इंदौर व जबलपुर में 20-22 सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है। सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव एनएमसी को भेजा है। जिन मेडिकल कॉलेज में 150 सीटें हैं, वहां 250, जहां 100 हैं, वहां 50 और जहां 180 हैं, वहां 20-20 सीटें बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा पीजी की सीटें बढ़ाई जा रही हैं ताकि स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैयार हो सकें। -डॉ. अरुणा कुमार, डायरेक्टर, मेडिकल एजुकेशन


