किशनगंज जूट मिल में जमीन घोटाला:जिला परिषद सदस्य ने आयुक्त को लिखा पत्र, DM बोले- जांच जारी

किशनगंज जूट मिल में जमीन घोटाला:जिला परिषद सदस्य ने आयुक्त को लिखा पत्र, DM बोले- जांच जारी

किशनगंज में जूट मिल की जमीन से जुड़े एक बड़े घोटाले का आरोप सामने आया है। एक जिला परिषद सदस्य ने पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त और डीएम को पत्र लिखकर भू-माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत से जूट मिल की जमीन पर अवैध कब्जे और खरीद-बिक्री का आरोप लगाया है। इस मामले में जिलाधिकारी ने जांच जारी होने की बात कही है। पत्र में आरोप है कि किशनगंज थाना क्षेत्र के देउसा राजस्व ग्राम, मौजा सिमलबाड़ी में स्थित जूट मिल की जमीन को कागजों में बेच दिया गया है। शिकायत के अनुसार, किशनगंज जूट मिल लिमिटेड के डायरेक्टर गौरव बजाज (कोलकाता निवासी) के नाम पर दर्ज जमाबंदी वाली इस जमीन पर भू-माफियाओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जूट मिल भवन को भी तोड़ दिया गया। जमीन विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गई दाखिल-खारिज वाद संख्या 3939/2023-2024 के तहत खाता संख्या 104, 126, 22 और खेसरा संख्या 889, 890, 894, 900, 891, 890, 949 (जमाबंदी संख्या 575) वाली भूमि का अंचल अधिकारी के आदेश पर दाखिल-खारिज किया गया है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है और जमीन विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गई है। मामले की गहन जांच की मांग की जिला परिषद सदस्य ने आयुक्त से जूट मिल की जमीन खरीदने-बेचने वाले व्यक्तियों की संपत्ति की जांच का आग्रह किया है। उन्होंने उद्योग विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किए बिना जमीन बेचने और अधिकारियों की मिलीभगत से दाखिल-खारिज करवाने के मामले की गहन जांच की मांग की है। कई उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि इस शिकायत की प्रतिलिपि किशनगंज के जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पूर्णिया के सांसद, निगरानी विभाग पटना, आर्थिक अपराध इकाई बिहार पटना, राजस्व मंत्री बिहार सरकार, उद्योग मंत्री बिहार सरकार और भारत सरकार, मुख्यमंत्री बिहार सरकार, गृहमंत्री भारत सरकार और प्रधानमंत्री भारत सरकार सहित कई उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई है। इस मामले पर किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि वर्तमान में यह रैयती जमीन है। जूट मिल की जमीन में खरीद-बिक्री हुई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह जांच कर रहा है कि खरीद-बिक्री में उद्योग विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं। किशनगंज में जूट मिल की जमीन से जुड़े एक बड़े घोटाले का आरोप सामने आया है। एक जिला परिषद सदस्य ने पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त और डीएम को पत्र लिखकर भू-माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत से जूट मिल की जमीन पर अवैध कब्जे और खरीद-बिक्री का आरोप लगाया है। इस मामले में जिलाधिकारी ने जांच जारी होने की बात कही है। पत्र में आरोप है कि किशनगंज थाना क्षेत्र के देउसा राजस्व ग्राम, मौजा सिमलबाड़ी में स्थित जूट मिल की जमीन को कागजों में बेच दिया गया है। शिकायत के अनुसार, किशनगंज जूट मिल लिमिटेड के डायरेक्टर गौरव बजाज (कोलकाता निवासी) के नाम पर दर्ज जमाबंदी वाली इस जमीन पर भू-माफियाओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जूट मिल भवन को भी तोड़ दिया गया। जमीन विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गई दाखिल-खारिज वाद संख्या 3939/2023-2024 के तहत खाता संख्या 104, 126, 22 और खेसरा संख्या 889, 890, 894, 900, 891, 890, 949 (जमाबंदी संख्या 575) वाली भूमि का अंचल अधिकारी के आदेश पर दाखिल-खारिज किया गया है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है और जमीन विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गई है। मामले की गहन जांच की मांग की जिला परिषद सदस्य ने आयुक्त से जूट मिल की जमीन खरीदने-बेचने वाले व्यक्तियों की संपत्ति की जांच का आग्रह किया है। उन्होंने उद्योग विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किए बिना जमीन बेचने और अधिकारियों की मिलीभगत से दाखिल-खारिज करवाने के मामले की गहन जांच की मांग की है। कई उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि इस शिकायत की प्रतिलिपि किशनगंज के जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पूर्णिया के सांसद, निगरानी विभाग पटना, आर्थिक अपराध इकाई बिहार पटना, राजस्व मंत्री बिहार सरकार, उद्योग मंत्री बिहार सरकार और भारत सरकार, मुख्यमंत्री बिहार सरकार, गृहमंत्री भारत सरकार और प्रधानमंत्री भारत सरकार सहित कई उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई है। इस मामले पर किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि वर्तमान में यह रैयती जमीन है। जूट मिल की जमीन में खरीद-बिक्री हुई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह जांच कर रहा है कि खरीद-बिक्री में उद्योग विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं।  

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