पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार करीब 20 साल बाद अपना आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग छोड़कर नए पते 7 सर्कुलर रोड शिफ्ट होने जा रहे हैं। आज से नीतीश कुमार इसमें ही रहेंगे। बेटे निशांत कुमार भी अब इस नए आवास में उनके साथ रहेंगे। शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर नीतीश कुमार ने 7 सर्कुलर रोड स्थित नए बंगले में विधिवत पूजा-अर्चना की थी। निशांत कुमार भी मौजूद रहे और पूजा के लिए बौद्ध भिक्षुओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। पूजा के बाद वह वापस 1 अणे मार्ग लौट गए थे। शनिवार सुबह तक उनके सामान को नए आवास में शिफ्ट करने का काम जारी रहा। बंगले को फूलों से सजाया गया है और सुरक्षा के मद्देनज़र यहां Z+ श्रेणी की सुरक्षा पहले ही तैनात कर दी गई है। शेष बचे सामान को भी आज ही शिफ्ट किए जाने की संभावना है। देखें सामान शिफ्टिंग की कुछ तस्वीरें… 20 सालों में ये दूसरी बार है, जब नीतीश कुमार CM हाउस छोड़कर 7 सर्कुलर वाले बंगले में शिफ्ट हुए। 2014 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने CM पद छोड़ दिया था। जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। तब वे रहने के लिए 7 सर्कुलर रोड बंगले आ गए थे। करीब 8 महीने इस बंगले में रहे थे। 7 सर्कुलर रोड होगा नीतीश कुमार का नया आवास नीतीश कुमार जिस 7 सर्कुलर रोड आवास में गए हैं, उसे उन्होंने अपनी विशेष देखरेख में तैयार करवाया है। इस बंगले की कुछ खास विशेषताएं हैं। यह बंगला आधुनिक तकनीक से बना है। बड़े भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम है। बंगले के लॉन को खास लुक देने के लिए कोलकाता से मंगवाकर घास लगाई गई है। इस आवास का उपयोग मुख्यमंत्री के कार्यालय (CM Office) के रूप में किया जा रहा था। लालू प्रसाद यादव के पड़ोसी बने नीतीश कुमार इस आवास में शिफ्ट होने के बाद नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एक-दूसरे के पड़ोसी बन गए। यहां से राबड़ी आवास बस दो घर बाद है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी। दोनों घर सर्कुलर रोड के दक्षिण तरफ है। नंबर 7 से है नीतीश को लगाव नीतीश कुमार अपने लिए नंबर 7 को लकी मानते हैं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री बने थे, तब उनके फोन नंबर का अंतिम अंक 7 था। नीतीश जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें जो गाड़ी मिली थी उसका नंबर 777 था। नीतीश ने 1977 में राजनीति शुरू की थी। 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को 7 निश्चय नाम दिया। अभी बिहार सरकार 7 निश्चय पार्ट-3 पर काम कर रही है। 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है 1 अणे मार्ग सीएम आवास एक अणे मार्ग लगभग 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है। यहीं से नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को दिशा दी। अब राज्यसभा जाने के बाद उनका 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना एक तरह से बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है। सरकारी बंगला अलॉट कौन करता है? बिहार सरकार के गजट के मुताबिक, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री को रहने के लिए घर देने की व्यवस्था है। सरकार का भवन निर्माण विभाग आवास अलॉट करता है। केंद्रीय पूल के तहत मंत्रियों को बंगला और विधानमंडल पूल के तहत विधायकों/MLC सदस्यों को फ्लैट दिया जाता है। कैबिनेट सचिवालय के मुताबिक, मंत्री को राजधानी में फ्री में एक आवास दिया जाता है, जिसमें स्टाफ क्वार्टर और बगीचा भी होता है। इसके रख-रखाव से लेकर साज-सज्जा भी सरकारी पैसे से होता है। बिजली, पानी फ्री रहता है। मंत्री इस आवास को मंत्री पद जाने के 30 दिन तक कर सकते हैं। उसके बाद उन्हें खाली करना पड़ता है। सभी 243 विधायकों के लिए विधायक आवास परिसर में घर बनाया गया है। हर आवास का एरिया एक समान 3,681 स्क्वायर फीट है। आवास की नंबरिंग विधानसभा की संख्या के हिसाब से है। इसी तरह विधान परिषद सदस्यों के लिए विधान पार्षद आवास परिसर में 75 आवास बनाए गए हैं। मंत्रियों के लिए अलग बंगला है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार करीब 20 साल बाद अपना आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग छोड़कर नए पते 7 सर्कुलर रोड शिफ्ट होने जा रहे हैं। आज से नीतीश कुमार इसमें ही रहेंगे। बेटे निशांत कुमार भी अब इस नए आवास में उनके साथ रहेंगे। शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर नीतीश कुमार ने 7 सर्कुलर रोड स्थित नए बंगले में विधिवत पूजा-अर्चना की थी। निशांत कुमार भी मौजूद रहे और पूजा के लिए बौद्ध भिक्षुओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। पूजा के बाद वह वापस 1 अणे मार्ग लौट गए थे। शनिवार सुबह तक उनके सामान को नए आवास में शिफ्ट करने का काम जारी रहा। बंगले को फूलों से सजाया गया है और सुरक्षा के मद्देनज़र यहां Z+ श्रेणी की सुरक्षा पहले ही तैनात कर दी गई है। शेष बचे सामान को भी आज ही शिफ्ट किए जाने की संभावना है। देखें सामान शिफ्टिंग की कुछ तस्वीरें… 20 सालों में ये दूसरी बार है, जब नीतीश कुमार CM हाउस छोड़कर 7 सर्कुलर वाले बंगले में शिफ्ट हुए। 2014 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने CM पद छोड़ दिया था। जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। तब वे रहने के लिए 7 सर्कुलर रोड बंगले आ गए थे। करीब 8 महीने इस बंगले में रहे थे। 7 सर्कुलर रोड होगा नीतीश कुमार का नया आवास नीतीश कुमार जिस 7 सर्कुलर रोड आवास में गए हैं, उसे उन्होंने अपनी विशेष देखरेख में तैयार करवाया है। इस बंगले की कुछ खास विशेषताएं हैं। यह बंगला आधुनिक तकनीक से बना है। बड़े भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम है। बंगले के लॉन को खास लुक देने के लिए कोलकाता से मंगवाकर घास लगाई गई है। इस आवास का उपयोग मुख्यमंत्री के कार्यालय (CM Office) के रूप में किया जा रहा था। लालू प्रसाद यादव के पड़ोसी बने नीतीश कुमार इस आवास में शिफ्ट होने के बाद नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एक-दूसरे के पड़ोसी बन गए। यहां से राबड़ी आवास बस दो घर बाद है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी। दोनों घर सर्कुलर रोड के दक्षिण तरफ है। नंबर 7 से है नीतीश को लगाव नीतीश कुमार अपने लिए नंबर 7 को लकी मानते हैं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री बने थे, तब उनके फोन नंबर का अंतिम अंक 7 था। नीतीश जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें जो गाड़ी मिली थी उसका नंबर 777 था। नीतीश ने 1977 में राजनीति शुरू की थी। 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को 7 निश्चय नाम दिया। अभी बिहार सरकार 7 निश्चय पार्ट-3 पर काम कर रही है। 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है 1 अणे मार्ग सीएम आवास एक अणे मार्ग लगभग 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है। यहीं से नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को दिशा दी। अब राज्यसभा जाने के बाद उनका 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना एक तरह से बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है। सरकारी बंगला अलॉट कौन करता है? बिहार सरकार के गजट के मुताबिक, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री को रहने के लिए घर देने की व्यवस्था है। सरकार का भवन निर्माण विभाग आवास अलॉट करता है। केंद्रीय पूल के तहत मंत्रियों को बंगला और विधानमंडल पूल के तहत विधायकों/MLC सदस्यों को फ्लैट दिया जाता है। कैबिनेट सचिवालय के मुताबिक, मंत्री को राजधानी में फ्री में एक आवास दिया जाता है, जिसमें स्टाफ क्वार्टर और बगीचा भी होता है। इसके रख-रखाव से लेकर साज-सज्जा भी सरकारी पैसे से होता है। बिजली, पानी फ्री रहता है। मंत्री इस आवास को मंत्री पद जाने के 30 दिन तक कर सकते हैं। उसके बाद उन्हें खाली करना पड़ता है। सभी 243 विधायकों के लिए विधायक आवास परिसर में घर बनाया गया है। हर आवास का एरिया एक समान 3,681 स्क्वायर फीट है। आवास की नंबरिंग विधानसभा की संख्या के हिसाब से है। इसी तरह विधान परिषद सदस्यों के लिए विधान पार्षद आवास परिसर में 75 आवास बनाए गए हैं। मंत्रियों के लिए अलग बंगला है।


