Maharashtra Day: भाषाई आधार पर कैसे हुआ महाराष्ट्र का उदय? 1956 से 1960 तक चला था भीषण आंदोलन

Maharashtra Day: भाषाई आधार पर कैसे हुआ महाराष्ट्र का उदय? 1956 से 1960 तक चला था भीषण आंदोलन

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने शुक्रवार को राज्य के 66वें स्थापना दिवस पर मुंबई के हुतात्मा चौक (Hutatma Chowk) पर संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन (Samyukta Maharashtra Movement) के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की। दरअसल आज 1 मई को महाराष्ट्र और गुजरात अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। यह दिन सिर्फ एक औपचारिक तारीख नहीं, बल्कि उस लंबे संघर्ष और आंदोलन की याद दिलाता है, जिसने भारत के नक्शे को भाषा के आधार पर बदल दिया। 1 मई 1960 को बॉम्बे राज्य का विभाजन कर दो नए राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात का गठन किया गया था।

आजादी के बाद उठी भाषाई राज्यों की मांग

भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी देश के अलग-अलग हिस्सों को एकजुट करना। इस जिम्मेदारी को सरदार वल्लभभाई पटेल ने संभाला। शुरुआत में राज्यों के गठन का आधार प्रशासनिक सुविधा को माना गया, लेकिन धीरे-धीरे देशभर में भाषा के आधार पर राज्यों की मांग तेज होने लगी।

1948 में एसके धर आयोग बनाया गया, जिसने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसके बाद जेवीपी कमेटी (जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, पट्टाभि सीतारमैया) ने भी 1949 में इसी विचार को खारिज कर दिया।

आंदोलन तेज हुआ, देशभर में उठी अलग राज्यों की आवाज

सरकार के इन फैसलों के बावजूद जनता की मांग कमजोर नहीं पड़ी। 1949 के बाद देश के कई हिस्सों में भाषाई आंदोलन तेज हो गए। इस दौरान तेलुगु भाषियों ने उग्र आंदोलन करना शुरू कर दिया था। अलग राज्य की मांग के लिए ‘ज्वाइंट कर्नाटक आंदोलन’ शुरू हो गया। इसके बाद साल 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत कन्नड़ भाषियों के लिए कर्नाटक, तेलुगु भाषियों के लिए आंध्र प्रदेश, तमिल बोलने वालों के लिए तमिलनाडु और मलयालम भाषियों के लिए केरल जैसे राज्यों का गठन हुआ। लेकिन बॉम्बे राज्य में गुजराती और मराठी भाषी लोगों का मुद्दा अब भी जस का तस बना हुआ था।

बॉम्बे राज्य में बढ़ा टकराव, दो हिस्सों में बंटे लोग

बॉम्बे राज्य में दो बड़े समूह बन चुके थे। एक तरफ मराठी और कोंकणी भाषी लोग थे, तो दूसरी तरफ गुजराती और कच्छी भाषी समुदाय। दोनों ही अपने-अपने भाषाई राज्य की मांग कर रहे थे।

इसी दौरान ‘संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन’ और ‘महागुजरात आंदोलन’ ने जोर पकड़ लिया। 1956 में अहमदाबाद में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई हुई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने आंदोलन को और उग्र बना दिया।

जब आंदोलन ने लिया निर्णायक मोड़

संयुक्त महाराष्ट्र समिति और महागुजरात जनता परिषद जैसे संगठनों ने आंदोलन को संगठित रूप दिया। दोनों तरफ से लगातार प्रदर्शन, बंद और विरोध हुए। कई जगहों पर आंदोलन हिंसक भी हो गया।

स्थिति को संभालना सरकार के लिए मुश्किल होता जा रहा था। बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने बॉम्बे राज्य के पुनर्गठन का फैसला लिया।

1 मई 1960: जब बना महाराष्ट्र और गुजरात

आखिरकार संसद में बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ और 1 मई 1960 को बॉम्बे राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया। महाराष्ट्र और गुजरात दो अलग-अलग राज्यों के रूप में अस्तित्व में आए।

मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाया गया, जबकि गुजरात को अलग राज्य का दर्जा मिला। दांग क्षेत्र गुजरात को सौंपा गया।

क्यों खास है 1 मई का दिन

तब से हर साल 1 मई को महाराष्ट्र और गुजरात में स्थापना दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस संघर्ष, आंदोलन और राजनीतिक फैसलों की याद दिलाता है, जिसने भाषा को पहचान और प्रशासन का आधार बनाया।

आज जब दोनों राज्य देश की आर्थिक और औद्योगिक ताकत माने जाते हैं, तो उनके गठन के पीछे की यह कहानी भारतीय लोकतंत्र और जन आंदोलनों की ताकत को भी दिखाती है। (IANS इनपुट के साथ)

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