हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के बाद शिलापट पर नामों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। जिले के 13 भाजपा जनप्रतिनिधियों के नाम शिलापट से गायब होने पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि केवल मिश्रिख सांसद अशोक रावत का नाम दर्ज है। कांग्रेस ने महिला जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर भाजपा पर हमला बोला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दोपहर 12:31 बजे रिमोट के माध्यम से गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। शिलापट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के नाम अंकित थे। इनके अलावा औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी और मिश्रिख सांसद अशोक रावत का नाम भी शामिल था। हरदोई जिले में भाजपा के दो लोकसभा सांसद, आठ विधानसभा विधायक और तीन विधान परिषद सदस्य हैं। प्रदेश सरकार में जिले से नितिन अग्रवाल और रजनी तिवारी भी मंत्री हैं। इन स्थानीय जनप्रतिनिधियों में से किसी का भी नाम शिलापट पर न होने से समर्थकों में असंतोष देखा गया।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और सदर विधानसभा प्रत्याशी रहे आशीष सिंह सोमवंशी एडवोकेट ने इस मामले को महिला जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा नारी वंदन और महिला सम्मान की बात करती है, लेकिन हरदोई की महिला मंत्री, महिला जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य महिला जनप्रतिनिधियों को शिलापट पर स्थान नहीं दिया गया। सोमवंशी ने यह भी कहा कि जिले की प्रथम नागरिक मानी जाने वाली महिला जिला पंचायत अध्यक्ष का नाम भी शामिल न होना भाजपा की कथनी और करनी में अंतर दर्शाता है। हरदोई के मंत्रियों और स्थानीय सांसदों के नाम छूटने पर भी चर्चा हो रही है। इस मुद्दे पर फिलहाल भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर शिलापट को लेकर बहस तेज हो गई है।


