साल 2030 तक चंद्रमा पर रहने लगेंगे इंसान! अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी ने किया दावा, लूनर बेस तैयार कर रहीं कंपनियां

साल 2030 तक चंद्रमा पर रहने लगेंगे इंसान! अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी ने किया दावा, लूनर बेस तैयार कर रहीं कंपनियां

चांद पर इंसान के रहने और काम करने की संभावना अब काफी हद तक वास्तविकता की ओर बढ़ रही है। अमेरिकी एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी वॉयेजर स्पेस (Voyager Space) के CEO डायलन टेलर ने चांद पर जीवन पर इंसानों के रहने के बारे में बड़ा दावा किया है। डायलन टेलर ने दावा किया कि 2030 तक चांद पर स्थायी मानव की मौजूदगी शुरू हो सकती है। डायलन टेलर के अनुसार, इस दशक के अंत तक चांद पर एक शुरुआती लूनर बेस तैयार हो जाएगा।

इंसान 2030 तक चांद पर रहकर काम करेंगे

अमेरिकी एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी वॉयेजर स्पेस (Voyager Space) के CEO डायलन टेलर ने दावा किया कि इस दशक के अंत तक चांद पर एक शुरुआती लूनर बेस तैयार हो जाएगा। इस लूनर बेस पर इंसान लंबे समय तक रहकर काम भी कर सकेंगे। टेलर ने हाल ही में सिंगापुर में CNBC के ‘CONVERGE LIVE’ इवेंट में कहा- अपोलो मिशन की तरह सीमित दौरों के बजाय, अब फोकस स्थायी उपस्थिति पर है। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि 2030 के शुरुआती वर्षों में चांद पर रोशनी दिखने लगेगी, क्योंकि वहां लोग रहने और काम करने लगेंगे।

टेलर का मानना है कि चांद पर रहने की शुरुआत इन्फ्लेटेबल (फुलाकर बड़े किए जाने वाले) आवासों से होगी। ये हल्के ढांचे धरती से आसानी से चांद तक ले जाए जा सकेंगे और वहां पहुंचकर फुलाकर रहने योग्य बनाए जा सकेंगे। ये संरचनाएं जीवन समर्थन प्रणाली (life support) से लैस होंगी, जो लंबे समय तक मानव जीवन को बनाए रख सकेंगी। इस दिशा में वॉयेजर स्पेस ने मैक्स स्पेस (Max Space) कंपनी में कई मिलियन डॉलर का रणनीतिक निवेश किया है।

चांद पर रहने के लिए घर तैयार कर रही मैक्स स्पेस

डायलन टेलर ने कहा कि मैक्स स्पेस के CEO सलीम मियां (Saleem Miyan) ने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसे टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य आवास विकसित करना है, जो चांद पर पहुंचने भर के लिए नहीं, बल्कि वहां लंबे समय तक रहने के लिए डिजाइन किए गए हों। स्पेसएक्स का सेल्फ-ग्रोइंग शहरइस बीच, स्पेसएक्स (SpaceX) भी चांद पर एक सेल्फ-ग्रोइंग सिटी (स्वयं विकसित होने वाला शहर) बनाने की योजना पर काम कर रहा है। एलन मस्क ने दावा किया है कि यह शहर 10 साल से भी कम समय में तैयार हो सकता है। मस्क ने हाल ही में कहा कि मार्स के बजाय फिलहाल चांद पर तेजी से बस्ती बसाने को प्राथमिकता दी जा रही है।

चांद पर रहने की चुनौतियां

चांद पर बेस बनाना अब संभव नजर आ रहा है, लेकिन कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। चांद पर तापमान बेहद गर्म और ठंडा है। वहां दिन में 120 डिग्री सेल्सियस तक गर्मी और रात में माइनस 130 डिग्री तक ठंड पड़ती है। चांद पर कोई वायुमंडल नहीं है, इसलिए खतरनाक कॉस्मिक रेडिएशन सीधे पहुंचता है। इसके अलावा चांद की धूल (लूनर रेगोलिथ) बेहद तेज, चिपचिपी और उपकरणों व स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है।

चांद पर इन गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियां उन्नत शील्डिंग, ऊर्जा स्रोत (सौर और न्यूक्लियर) तथा रोबोटिक निर्माण तकनीकों पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम और निजी कंपनियों के तेज प्रयासों से 2030 का दशक चांद पर मानव सभ्यता के विस्तार का शुरुआती दौर साबित हो सकता है। अगर ये योजनाएं सफल रहीं तो चांद न सिर्फ वैज्ञानिक अनुसंधान का केंद्र बनेगा, बल्कि भविष्य में मंगल और गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

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