भीषण गर्मी के मद्देनजर कैमूर वन विभाग ने वन्यजीवों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की है। कैमूर के डीएफओ संजीव रंजन ने जानकारी दी कि जंगल के विभिन्न क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे वन क्षेत्र, विशेषकर अधौरा पूर्वी, अधौरा पश्चिमी और पहाड़ी इलाकों में लगभग 44 कृत्रिम जल स्रोत (वॉटर होल) बनाए गए हैं। इन वॉटर होल्स में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर सात से आठ दिन पर टैंकरों के माध्यम से नियमित रिफिलिंग की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीवों को पानी के लिए भटकने से रोकना और उन्हें पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजातियां निवास करती डीएफओ ने बताया कि इस पहाड़ी और वन क्षेत्र में तेंदुआ, भालू, सियार, हिरण और सांभर जैसी महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजातियां निवास करती हैं। इनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। इसके साथ ही, संजीव रंजन ने पशुपालकों से अपील की है कि वे गर्मी के इस मौसम में अपने पालतू जानवरों को जंगल में खुला न छोड़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था विशेष रूप से जंगली जानवरों के लिए है। पशुपालकों को अपने जानवरों को घरों के भीतर रखना चाहिए और वहीं उनके चारे-पानी का प्रबंध करना चाहिए, ताकि जंगली और पालतू जानवरों के बीच संभावित टकराव को टाला जा सके। भीषण गर्मी के मद्देनजर कैमूर वन विभाग ने वन्यजीवों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की है। कैमूर के डीएफओ संजीव रंजन ने जानकारी दी कि जंगल के विभिन्न क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे वन क्षेत्र, विशेषकर अधौरा पूर्वी, अधौरा पश्चिमी और पहाड़ी इलाकों में लगभग 44 कृत्रिम जल स्रोत (वॉटर होल) बनाए गए हैं। इन वॉटर होल्स में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर सात से आठ दिन पर टैंकरों के माध्यम से नियमित रिफिलिंग की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीवों को पानी के लिए भटकने से रोकना और उन्हें पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजातियां निवास करती डीएफओ ने बताया कि इस पहाड़ी और वन क्षेत्र में तेंदुआ, भालू, सियार, हिरण और सांभर जैसी महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजातियां निवास करती हैं। इनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। इसके साथ ही, संजीव रंजन ने पशुपालकों से अपील की है कि वे गर्मी के इस मौसम में अपने पालतू जानवरों को जंगल में खुला न छोड़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था विशेष रूप से जंगली जानवरों के लिए है। पशुपालकों को अपने जानवरों को घरों के भीतर रखना चाहिए और वहीं उनके चारे-पानी का प्रबंध करना चाहिए, ताकि जंगली और पालतू जानवरों के बीच संभावित टकराव को टाला जा सके।


