बूंदी में कृषि विज्ञान केंद्र में मंगलवार को उर्वरक विक्रेताओं के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. महेश चौधरी ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नई कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराना है, ताकि वे किसानों को सही और प्रभावी सलाह दे सकें। चौधरी ने बताया कि अधिकांश किसान सीधे कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों तक नहीं पंच पाते हैं। वे कृषि आदान विक्रेताओं के माध्यम से ही उर्वरकों की खरीद और उपयोग संबंधी निर्णय लेते हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि कृषि आदान विक्रेता उर्वरकों के प्रकार, मात्रा, उपयोग की विधि और संतुलित पोषण के बारे में समुचित एवं वैज्ञानिक जानकारी रखें, जिससे वे किसानों को सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकें। प्रशिक्षण में 35 लोग ले रहे भाग
उन्होंने कहा कि वर्तमान कृषि परिदृश्य में संतुलित उर्वरक प्रबंधन बहुत जरूरी हो गया है। यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। इसलिए, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ ही सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग अपनाना जरूरी है।
इस दौरान तकनीकी सहायक महेंद्र चौधरी, लोकेश प्रजापत, दीपक कुमार, हरदीप भी मौजूद रहे।


