भागलपुर जिले के बरारी स्थित श्मशान घाट में विद्युत शवदाह गृह पिछले छह महीने से बंद पड़ा है। मशीन के कई हिस्सों में खराबी आने के कारण गरीब परिवारों को अंतिम संस्कार कराने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शवदाह गृह चालू रहने पर लोग महज 500 रुपए में अंतिम संस्कार करवा लेते थे, लेकिन अब लकड़ी के सहारे अंतिम संस्कार कराने में 3 से 4 हजार रुपए तक खर्च हो रहे हैं। साथ ही, इसमें अधिक समय भी लग रहा है। टेंडर जारी करने के बाद भी काम नहीं हुआ बरारी श्मशान घाट पर भागलपुर सहित आसपास के जिलों और झारखंड के गोड्डा, देवघर, साहिबगंज सहित अन्य क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं। निगम प्रशासन की स्थायी समिति की बैठक में इसे फिर से चालू करने का निर्णय लिया गया था। मेयर और नगर आयुक्त ने निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए थे, लेकिन संचालन के सभी प्रयास अब तक फाइलों और निर्देशों तक ही सीमित है। यह सुविधा साल 2025 से बंद है। इसे चालू करने की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। निर्णय और निर्देश के दो माह बाद भी विद्युत शवदाह गृह की मरम्मत के लिए एजेंसी बहाल नहीं हो सकी है। अब तक सिर्फ सरकार से दर(रेट) मांगने के बाद टेंडर जारी किया गया है। एजेंसियों से कोटेशन प्राप्त किए गए हैं। प्राप्त दर को सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है। आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया अधूरी होने के कारण मरम्मत कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।निगम प्रशासन ने विद्युत शवदाह गृह की मरम्मत पर 30 लाख रुपए खर्च करने का बजट निर्धारित किया है। निगम एजेंसी के माध्यम से 18 प्रकार के उपकरणों की खरीद करेगा और उन्हीं से इंस्टॉलेशन का कार्य भी कराया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को ज्यादा परेशानी विद्युत शवदाह गृह के प्रबंधक राहुल कुमार ने बताया कि पिछले कुछ समय से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है, जिससे आम लोगों, विशेषकर गरीब परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मशीन का आईडी फैन खराब हो गया है। इसके अलावा भट्ठी में लगा नाइक्रोम तार की चार क्वाइलें कट चुकी हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगा डार्कलिन सिस्टम भी काम नहीं कर रहा है। इन तकनीकी खामियों के कारण विद्युत शवदाह गृह का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है। शवदाह गृह बंद रहने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए गोलादार से लकड़ी खरीदनी पड़ती है और कई बार चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार कराया जाता है। विद्युत शवदाह गृह में जहां गरीबों के लिए मात्र 500 रुपए और सामान्य लोगों के लिए 1100 रुपए में अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध थी। लकड़ी से अंतिम संस्कार कराने में 3 से 4 हजार रुपए तक खर्च हो जाते हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कोरोना काल में हुआ था उद्घाटन प्रबंधक राहुल कुमार ने आगे बताया कि इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। हर बार जल्द मरम्मत कराने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित इस विद्युत शवदाह गृह का उद्घाटन कोरोना काल में किया गया था, ताकि लोगों को सस्ती, सुलभ और पर्यावरण अनुकूल अंतिम संस्कार की सुविधा मिल सके। एजेंसी की बहाली के लिए निकलेगी टेंडर मामले पर निगम के योजना शाखा प्रभारी आदित्य जायसवाल ने बताया कि एजेंसियों से रेट का कोटेशन प्राप्त हो गया है और इसे सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर को भेजकर स्वीकृति भी ले ली गई है। आगे एजेंसी की बहाली के लिए निविदा जारी की जाएगी। फाइल तैयार हो रही है और जल्द ही निविदा जारी कर दी जाएगी। भागलपुर जिले के बरारी स्थित श्मशान घाट में विद्युत शवदाह गृह पिछले छह महीने से बंद पड़ा है। मशीन के कई हिस्सों में खराबी आने के कारण गरीब परिवारों को अंतिम संस्कार कराने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शवदाह गृह चालू रहने पर लोग महज 500 रुपए में अंतिम संस्कार करवा लेते थे, लेकिन अब लकड़ी के सहारे अंतिम संस्कार कराने में 3 से 4 हजार रुपए तक खर्च हो रहे हैं। साथ ही, इसमें अधिक समय भी लग रहा है। टेंडर जारी करने के बाद भी काम नहीं हुआ बरारी श्मशान घाट पर भागलपुर सहित आसपास के जिलों और झारखंड के गोड्डा, देवघर, साहिबगंज सहित अन्य क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं। निगम प्रशासन की स्थायी समिति की बैठक में इसे फिर से चालू करने का निर्णय लिया गया था। मेयर और नगर आयुक्त ने निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए थे, लेकिन संचालन के सभी प्रयास अब तक फाइलों और निर्देशों तक ही सीमित है। यह सुविधा साल 2025 से बंद है। इसे चालू करने की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। निर्णय और निर्देश के दो माह बाद भी विद्युत शवदाह गृह की मरम्मत के लिए एजेंसी बहाल नहीं हो सकी है। अब तक सिर्फ सरकार से दर(रेट) मांगने के बाद टेंडर जारी किया गया है। एजेंसियों से कोटेशन प्राप्त किए गए हैं। प्राप्त दर को सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है। आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया अधूरी होने के कारण मरम्मत कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।निगम प्रशासन ने विद्युत शवदाह गृह की मरम्मत पर 30 लाख रुपए खर्च करने का बजट निर्धारित किया है। निगम एजेंसी के माध्यम से 18 प्रकार के उपकरणों की खरीद करेगा और उन्हीं से इंस्टॉलेशन का कार्य भी कराया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को ज्यादा परेशानी विद्युत शवदाह गृह के प्रबंधक राहुल कुमार ने बताया कि पिछले कुछ समय से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है, जिससे आम लोगों, विशेषकर गरीब परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मशीन का आईडी फैन खराब हो गया है। इसके अलावा भट्ठी में लगा नाइक्रोम तार की चार क्वाइलें कट चुकी हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगा डार्कलिन सिस्टम भी काम नहीं कर रहा है। इन तकनीकी खामियों के कारण विद्युत शवदाह गृह का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है। शवदाह गृह बंद रहने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए गोलादार से लकड़ी खरीदनी पड़ती है और कई बार चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार कराया जाता है। विद्युत शवदाह गृह में जहां गरीबों के लिए मात्र 500 रुपए और सामान्य लोगों के लिए 1100 रुपए में अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध थी। लकड़ी से अंतिम संस्कार कराने में 3 से 4 हजार रुपए तक खर्च हो जाते हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कोरोना काल में हुआ था उद्घाटन प्रबंधक राहुल कुमार ने आगे बताया कि इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। हर बार जल्द मरम्मत कराने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित इस विद्युत शवदाह गृह का उद्घाटन कोरोना काल में किया गया था, ताकि लोगों को सस्ती, सुलभ और पर्यावरण अनुकूल अंतिम संस्कार की सुविधा मिल सके। एजेंसी की बहाली के लिए निकलेगी टेंडर मामले पर निगम के योजना शाखा प्रभारी आदित्य जायसवाल ने बताया कि एजेंसियों से रेट का कोटेशन प्राप्त हो गया है और इसे सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर को भेजकर स्वीकृति भी ले ली गई है। आगे एजेंसी की बहाली के लिए निविदा जारी की जाएगी। फाइल तैयार हो रही है और जल्द ही निविदा जारी कर दी जाएगी।


