संतोषी माता मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कलश यात्रा निकली:501 महिलाओं ने लिया हिस्सा, जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई; 5 दिवसीय अनुष्ठान शुरू

संतोषी माता मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कलश यात्रा निकली:501 महिलाओं ने लिया हिस्सा, जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई; 5 दिवसीय अनुष्ठान शुरू

गिरिडीह शहरी क्षेत्र के मकतपुर स्थित संतोषी माता मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और जीर्णोद्धार के उपलक्ष्य में सोमवार को भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 501 महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर यात्रा में भाग लिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखध्वनि, भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां, पुरुष, युवक और बच्चे श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए और अपनी आस्था प्रकट की। कुएं से पवित्र जल भरकर कलश में स्थापित किया कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद कलश यात्रा विधिवत रूप से निकाली गई। यह यात्रा मकतपुर स्थित मंदिर से शुरू होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई बरगंडा स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने कुएं से पवित्र जल भरकर कलश में स्थापित किया। इसके बाद यात्रा पुनः बरगंडा से जिला परिषद मोड़, टावर चौक, कालीबाड़ी चौक होते हुए मंदिर परिसर लौटी। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। कई स्थानों पर भक्ति संगीत और धार्मिक झांकियों ने यात्रा को आकर्षक बनाया। मंदिर पहुंचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना के साथ पांच दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत की गई। 28 अप्रैल को विधि-विधान के साथ विशेष पूजा होगी आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के रूप में आयोजित किया जा रहा है। 28 अप्रैल को विधि-विधान के साथ विशेष पूजा होगी। 29 अप्रैल को रंगारंग सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भजन-कीर्तन और बिहार के कलाकारों की प्रस्तुतियां शामिल होंगी। 30 अप्रैल को नगर भ्रमण के तहत भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी। 1 मई को संतोषी माता मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और जीर्णोद्धार कार्य संपन्न होगा, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सुसज्जित किया गया है। स्थानीय समिति, सामाजिक कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं द्वारा आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया जा रहा है। सुरक्षा और व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता का यह भव्य आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को भी सुदृढ़ करने का संदेश दे रहा है। गिरिडीह शहरी क्षेत्र के मकतपुर स्थित संतोषी माता मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और जीर्णोद्धार के उपलक्ष्य में सोमवार को भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 501 महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर यात्रा में भाग लिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखध्वनि, भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां, पुरुष, युवक और बच्चे श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए और अपनी आस्था प्रकट की। कुएं से पवित्र जल भरकर कलश में स्थापित किया कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद कलश यात्रा विधिवत रूप से निकाली गई। यह यात्रा मकतपुर स्थित मंदिर से शुरू होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई बरगंडा स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने कुएं से पवित्र जल भरकर कलश में स्थापित किया। इसके बाद यात्रा पुनः बरगंडा से जिला परिषद मोड़, टावर चौक, कालीबाड़ी चौक होते हुए मंदिर परिसर लौटी। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। कई स्थानों पर भक्ति संगीत और धार्मिक झांकियों ने यात्रा को आकर्षक बनाया। मंदिर पहुंचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना के साथ पांच दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत की गई। 28 अप्रैल को विधि-विधान के साथ विशेष पूजा होगी आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के रूप में आयोजित किया जा रहा है। 28 अप्रैल को विधि-विधान के साथ विशेष पूजा होगी। 29 अप्रैल को रंगारंग सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भजन-कीर्तन और बिहार के कलाकारों की प्रस्तुतियां शामिल होंगी। 30 अप्रैल को नगर भ्रमण के तहत भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी। 1 मई को संतोषी माता मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और जीर्णोद्धार कार्य संपन्न होगा, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सुसज्जित किया गया है। स्थानीय समिति, सामाजिक कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं द्वारा आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया जा रहा है। सुरक्षा और व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता का यह भव्य आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को भी सुदृढ़ करने का संदेश दे रहा है।  

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