कोलंबिया में 31 मई 2026 को राष्ट्रपति चुनाव होना है। राष्ट्रपति चुनाव से पहले कोलंबिया में बड़ी घटना हुई। कोलंबिया के दक्षिण-पश्चिमी कोका (काउका) क्षेत्र में पैन-अमेरिकन हाईवे पर शनिवार को भीषण बम विस्फोट हुआ। इस धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 38 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बम धमाके में मौत का आंकड़ा 19 बताया जा रहा है।
राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने दिया कड़ी कार्रवाई आदेश
कोलंबिया में हुए बम ब्लास्ट में जान गंवाने वालों में 5 बच्चे भी शामिल हैं। राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस हमले के लिए कुख्यात फार्क (कोलंबिया रिवोल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेस) के विद्रोही गुट और उनके सरगना इवान मोरडिस्को (नामक नेस्तोर ग्रेगोरियो वेरा फर्नांडीज) को जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो हमलावरों को आतंकवादी, फासीवादी और ड्रग तस्कर करार दिया है।
पेट्रो ने कहा- मोरडिस्को को पाब्लो एस्कोबार की तरह देश का सबसे खतरनाक अपराधी माना जाना चाहिए। उन्होंने सेना को निर्देश दिया कि क्षेत्र में सबसे बेहतर सैनिकों को तैनात करके विद्रोहियों का मुकाबला किया जाए। इसके पहले कोलंबिया में पिछले 2 दिनों में 26 आतंकी हमले हो चुके हैं। कॉका (काउका) क्षेत्र कोकीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां फार्क के विद्रोही गुट चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए ड्रग तस्करी, जबरन वसूली और हिंसा का सहारा ले रहे हैं। कोलंबिया के रक्षा मंत्री ने हिंसा प्रभावित क्षेत्र में सेना की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी हैं।
कोलंबिया में राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार
राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल 3 प्रमुख उम्मीदवार वामपंथी इवान सेपेड़ा (ऐतिहासिक संधि गठबंधन), दक्षिणपंथी अबेलार्डो डे ला एस्प्रीला और केंद्र-दक्षिणपंथी पालोमा वालेंसिया शामिल हैं। मौजूदा समय में राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल तीनों उम्मीदवार आतंकियों के निशाने पर हैं। राष्ट्रपति पद के सभी प्रत्याशियों को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
पिछले साल राष्ट्रपति उम्मीदवार की हुई थी हत्या
पिछले साल जून में दक्षिणपंथी राष्ट्रपति उम्मीदवार मिगुएल उरिबे तुर्बे की राजधानी बोगोटा में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस खूनी खेल के पीछे मुख्य रूप से फार्क के विद्रोही हैं, जिन्होंने 2016 के शांति समझौते को ठुकरा दिया था।
ये गुट अब ड्रग तस्करी और जबरन वसूली के दम पर समानांतर सत्ता चला रहे हैं। इस गुट के समर्थक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। देश में सुरक्षा प्रमुख मुद्दा बन गया है। वामपंथी उम्मीदवार सेपेड़ा पेट्रो की टोटल पीस नीति को जारी रखना चाहते हैं, जबकि दक्षिणपंथी उम्मीदवार सख्त सैन्य कार्रवाई और एल सल्वाडोर मॉडल की बात कर रहे हैं।



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