मैनपुरी में परिवार परामर्श केंद्र ने एक बार फिर एक टूटते रिश्ते को बचाया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शुक्रवार को आयोजित केंद्र में 17 मामलों की सुनवाई हुई। इनमें से एक मामले में पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर उन्हें साथ भेजा गया। यह मामला अनुपम और शिवानी से संबंधित था, जिनका विवाह वर्ष 2020 में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। पारिवारिक मतभेदों के कारण वे लगभग तीन माह से अलग रह रहे थे। जब यह प्रकरण परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, तो दोनों पक्षों को पांच अलग-अलग तारीखों पर बुलाकर काउंसलिंग की गई। लगातार बातचीत, समझाइश और मध्यस्थता के बाद दोनों ने अपने मतभेद सुलझा लिए। इसके बाद वे फिर से साथ रहने के लिए सहमत हो गए। संवाद के माध्यम से समाधान निकला परिवार परामर्श केंद्र से अनुपम और शिवानी को साथ विदा किया गया। इस मामले में संवाद के माध्यम से समाधान निकलने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर घरेलू विवादों में कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचती है। शुक्रवार की सुनवाई में कुल 17 मामलों पर विचार किया गया। शेष मामलों के लिए अगली तारीखें तय की गईं। केंद्र की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि सभी विवादों को अदालत तक ले जाना आवश्यक नहीं है; कई रिश्तों को बातचीत के माध्यम से भी बचाया जा सकता है। इस दौरान प्रभारी परिवार परामर्श केंद्र हेमलता सिंह, काउंसलर रामकिशन यादव, मनोरमा सिंह, महिला हेड कांस्टेबल कुसुम और कांस्टेबल रेशू देवी उपस्थित रहीं। अधिकारियों ने बताया कि परिवार परामर्श केंद्र का मुख्य उद्देश्य केवल विवादों को सुलझाना नहीं, बल्कि परिवारों को बिखरने से बचाना भी है।


