West Bengal Election: परसेंटेज बढ़ गया, पर असल में 47 लाख वोट कम पड़े हैं

West Bengal Election: परसेंटेज बढ़ गया, पर असल में 47 लाख वोट कम पड़े हैं

West Bengal Election: बंगाल चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 90 पार चला गया है। जानिए क्यों और इसके मायने क्या हो सकते हैं? 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करीब 93 फीसदी वोटिंग हुई। भारतीय चुनावी इतिहास में शायद इतनी बंपर वोटिंग पहली बार हुई है। तमिलनाडु में भी इस बार मतदान का रिकॉर्ड (85.1%) बना है। पश्चिम बंगाल की बात करें तो दोनों ही पक्ष (तृणमूल कांग्रेस और भाजपा) इस एक-दूसरे के खिलाफ और अपने-अपने पक्ष में हुई वोटिंग बता रहा है। इसकी असलियत तो 4 मई को ही सामने आएगी, लेकिन हम बात करते हैं बंपर वोटिंग से जुड़ी आज की हकीकत की।

SIR का असर

एक हकीकत यह है कि चुनाव आयोग द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जहां भी मतदान हुए वहां अमूमन वोटिंग प्रतिशत बढ़ा ही है। असम, केरल, पुडुचेरी में भी रिकॉर्ड वोटिंग हुई है। इससे पहले बिहार में भी ऐसा ही हुआ। यह स्वाभाविक भी है।

SIR के बाद मृत, दूसरी जगह रहने चले गए और अनुपलब्ध मतदाताओं के नाम हट जाने से मतदाता कम हो जाते हैं तो मतदान करने वाले लोग अगर पिछले चुनाव के बराबर भी होंगे तो प्रतिशत बढ़ जाएगा।

चुनाव वर्ष केरल (मतदान %) असम (मतदान %)
1991 73.4% 75.3%
1996 71.2% 78.4%
2001 72.5% 75.1%
2006 72.3% 75.7%
2011 74.9% 75.9%
2016 77.1% 83.1%
2021 73.9% 81.8%
2026* 78.2% 85.6%

SIR के बाद पुराने वोटर हटते हैं तो नए जुड़ते भी हैं। वे ‘जेनुइन वोटर्स’ होते हैं। वे वोट डालते हैं। ऐसे में भी मतदान प्रतिशत बढ़ता है।

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का SIR बड़ा विवादित और मतदाताओं के लिए एक कठिन परीक्षा सरीखा रहा। मतदान के रिकॉर्ड से एक बात साफ दिखाई देती है कि जिन लोगों ने यह परीक्षा पास कर ली, वे मतदान केंद्र तक पहुंचे भी।

विवरण SIR से पहले (अक्टूबर 2025) SIR के बाद (अप्रैल 2026) शुद्ध परिवर्तन (कमी)
कुल मतदाता संख्या 7.66 करोड़ 6.75 करोड़ 91 लाख (~12%)
महिला मतदाता ~3.73 करोड़ (अनुमानित) ~3.11 करोड़ ~61.9 लाख
लिंगानुपात (Electoral) ~973 ~961 -12 अंक

पश्चिम बंगाल के जिन 152 विधान सभा क्षेत्रों में 23 अप्रैल को मतदान हुआ वहां 2021 में जितने वोट पड़े थे उसकी तुलना में इस बार कुल मतदाताओं की संख्या 12 प्रतिशत कम थी। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक इन सीटों पर इस बार पिछली बार की तुलना में करीब 47 लाख वोट कम पड़े हैं। इसके बावजूद मतदान प्रतिशत 10 प्रतिशत बढ़ गया। इसके पीछे की जाहिर वजह वही है, जिनका जिक्र ऊपर किया गया। राज्य स्तर पर भी बात करें तो पश्चिम बंगाल में SIR के बाद कुल 91 लाख (11.63 प्रतिशत) मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर हो गए।

मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ी

पिछले कुछ चुनावों से देश भर में देखा जा रहा है कि मतदान के प्रति लोग जागरूक हुए हैं। इसकी कई वजह हो सकती हैं। चुनाव आयोग भी लगातार मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान तेज करता रहा है। पिछले कुछ सालों से चुनाव आम तौर पर दो पार्टियों या गठबंधनों के बीच ही लड़े जा रहे हैं। मतदाताओं के मतदान केंद्र तक पहुंचने की एक वजह यह भी है। पार्टियां भी अपने-अपने समर्थकों को बूथ तक ले जाने के लिए अभियान चलाती हैं।

बंपर वोटिंग से किसका फायदा?

एक सच यह भी है कि बंपर वोटिंग क्यों हुई है, सत्ता पक्ष के खिलाफ या विरोधी पक्ष के समर्थन में? इस सवाल का जवाब परिणाम आने के बाद ही मिल सकता है। लेकिन, यह सच है कि 2026 का बंगाल चुनाव ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन चुनाव है। ममता बनर्जी ने जितने वोट शेयर पर पहली बार सरकार बनाई थी, भाजपा उस लेवल के करीब पिछले चुनाव में ही पहुंच चुकी है। देखिए, तृणमूल कैसे अपना वोट और सीट बढ़ाती गई

चुनाव वर्ष कुल सीटें टीएमसी द्वारा जीती गई सीटें वोट शेयर (%) मुख्य गठबंधन / स्थिति
2001 294 60 30.66% कांग्रेस के साथ गठबंधन (विपक्ष में)
2006 294 30 26.64% अकेले चुनाव (विपक्ष में, भारी गिरावट)
2011 294 184 38.93% कांग्रेस के साथ गठबंधन (सत्ता में आगमन)
2016 294 211 44.91% अकेले चुनाव (दूसरी बार पूर्ण बहुमत)
2021 294 215 48.02% अकेले चुनाव (तीसरी बार प्रचंड बहुमत)

50 फीसदी के करीब पहुंच कर यह बढ़त कायम रखना टीएमसी के लिए कम बड़ी चुनौती नहीं है, खास कर तब जब भाजपा भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

पश्चिम बंगाल चुनाव में ऐसे मजबूत होती गई भाजपा

चुनाव वर्ष कुल सीटें भाजपा द्वारा जीती गई सीटें वोट शेयर (%)
2006 294 0 1.93%
2011 294 0 4.06%
2016 294 3 10.16%
2021 294 77 38.14%

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