मॉडल हर्षा बनीं हर्षानंद गिरि, संन्यास पर विवाद:गुरु सुमनानंद गिरि बोले- पहले एक बार मुंडन करवा चुकी थीं, इसलिए नहीं कराया

मॉडल हर्षा बनीं हर्षानंद गिरि, संन्यास पर विवाद:गुरु सुमनानंद गिरि बोले- पहले एक बार मुंडन करवा चुकी थीं, इसलिए नहीं कराया

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आईं पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने रविवार को संन्यास ले लिया। उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज से उन्होंने दीक्षा ग्रहण की। संन्यास के बाद उन्हें स्वामी हर्षानंद गिरि नाम दिया गया। हर्षा के संन्यास की खबर के बाद भोपाल में विरोध शुरू हो गया। संन्यास परंपरा को लेकर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह संन्यास सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। महाराज अनिलानंद के अनुसार, प्रयागराज कुंभ के दौरान हर्षा ने संन्यास लेने का दावा किया था, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे में उनका संन्यास स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी मांग की कि हर्षा को दीक्षा देने वाले सुमनानंद गिरि महाराज की जांच की जाए। हर्षा के संन्यास पर उठे सवाल, भास्कर ने सुमनानंद गिरि और आचार्य से की बातचीत हर्षा उर्फ हर्षानंद गिरि के संन्यास को लेकर उठ रहे विवाद के बीच दैनिक भास्कर की टीम ने सुमनानंद गिरि और संन्यास परंपरा का पूजन कराने वाले आचार्य तन्मय वेदका दातार से बातचीत की। इसमें सामने आया कि हर्षा का संन्यास जल्दबाजी में किया गया और कई पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ। ऐसे में भविष्य में उनके संन्यास पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। आचार्य के अनुसार, संन्यास लेने से पहले 17 प्रकार के पिंडदान किए जाते हैं, जिसमें माता-पिता के साथ स्वयं का भी पिंडदान शामिल होता है। इस प्रक्रिया में बाल मुंडन करना अनिवार्य होता है, लेकिन हर्षा का संन्यास बिना बाल कटवाए ही करा दिया गया। संन्यास लेने के बाद भी हर्षा आम युवतियों की तरह मेकअप और आभूषणों के साथ नजर आ रही हैं, जबकि संन्यास परंपरा में इसका उपयोग वर्जित माना जाता है। वह अभी भी पारंपरिक साध्वी स्वरूप या संन्यासी वेशभूषा में नजर नहीं आई हैं, जिससे इस पूरे मामले पर सवाल और गहराते जा रहे हैं। सुमनानंद गिरि बोले- हर्षा से 50 बार पूछने के बाद ही दीक्षा दी गई हर्षा रिछारिया के संन्यास को लेकर उठे सवालों पर उन्हें दीक्षा देने वाले सुमनानंद गिरि महाराज ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि संन्यास के दौरान हर्षा ने बाल इसलिए नहीं कटवाए, क्योंकि वह पहले ही एक बार मुंडन करवा चुकी थीं। भोपाल में लगे आरोपों पर उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान हर्षा शाही रथ पर सवार हुई थीं, तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा दी गई दीक्षा के बाद हर्षा, हर्षानंद गिरि के रूप में पूरी तरह संन्यासी बन चुकी हैं। सुमनानंद गिरि ने बताया कि दीक्षा देने से पहले मैंने हर्षा से बार-बार नियमों के पालन को लेकर पूछा। लगभग 50 बार पुष्टि करने के बाद ही मैंने दीक्षा दी। उन्होंने यह भी कहा कि अब हर्षा किसी भी अखाड़े में जाएं, इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है। दीक्षा के समय हर्षा के परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे। हर्षा पर उठ रहे सवाल पर आचार्य ने दिए जवाब सवाल- हर्षा रिछारिया ने कौन सा संन्यास लिया? आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा- हर्षा ने संन्यास लिया है। उनका पिंडदान हुआ, शिखा और दंड का त्याग भी कराया गया। संन्यास लेने के बाद उन्हें सांसारिक जीवन का त्याग करना होगा। सवाल- मुंडन नहीं करवाया
आचार्य ने कहा- मुंडन कराना या शिखा त्याग करना गुरु के निर्णय पर निर्भर होता है। दीक्षा देने वाला गुरु तय करता है कि प्रक्रिया किस रूप में पूरी की जाएगी। सवाल- नाम परिवर्तन का क्या नियम?
आचार्य ने कहा- संन्यास के बाद साधक को अपना सांसारिक नाम छोड़ना होता है। गुरु द्वारा दिया गया नया नाम ही जीवन भर अपनाना पड़ता है। साथ ही ब्रह्मचर्य, व्रत और तप का पालन अनिवार्य होता है। संन्यास में गुरु की आज्ञा सर्वोपरि मानी जाती है। सवाल- संन्यास के दिन की प्रक्रिया
आचार्य ने कहा- संन्यास के दिन सुबह से व्रत शुरू होता है और दिनभर तपस्या की जाती है। शाम को शिप्रा तट पर दशविधि स्नान, पिंडदान और अन्य धार्मिक विधियां कराई जाती हैं। इसके बाद साधकों को अखाड़े में लाकर धर्म ध्वजा के नीचे जप कराया जाता है। रात्रि में आचार्य और महामंडलेश्वर द्वारा विजय हवन संस्कार कराया जाता है और उसी समय गुरु मंत्र देकर दीक्षा पूर्ण की जाती है। सुमनानंद गिरि महाराज से दीक्षा लेने के बाद हर्षा निरंजनी अखाड़े की संत मानी जाएंगी। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
मॉडल का संन्यास…परंपरा के खिलाफ,संत समिति अध्यक्ष बोले-इसकी जांच हो महाकुंभ 2024 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। वे आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। हालांकि, उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद को ऐतराज है। पढ़िए पूरी खबर। हर्षा के मेकअप पर सवाल: बोलीं- धूप में खड़े रहना है तो सनस्क्रीन जरूरी सोशल मीडिया ट्रेंड से चर्चा में आईं महाकुंभ-24 की वायरल साध्वी हर्षा रिछारिया अब आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। अब वे हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। महाकुंभ से अब तक का समय उन्होंने बेहद कठिन बताया। पढ़िए पूरी खबर।

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