मधुबनी में पॉक्सो आरोपी को 11 साल की सजा:कोर्ट ने 11 हजार रुपये जुर्माने के साथ सश्रम कारावास सुनाई

मधुबनी में पॉक्सो आरोपी को 11 साल की सजा:कोर्ट ने 11 हजार रुपये जुर्माने के साथ सश्रम कारावास सुनाई

मधुबनी जिला कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत एक महत्वपूर्ण फैसले में आरोपी भरत मंडल को 11 वर्ष की सश्रम कारावास और 11,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-VII, पॉक्सो कोर्ट, मधुबनी द्वारा आरएस शिविर थाना कांड संख्या 312/19 में सुनाया गया। भरत मंडल, पुत्र अशोक मंडल, ग्राम- दीप पश्चिम, थाना- आरएस शिविर, झंझारपुर, जिला- मधुबनी को धारा 363, 366(ए), 376 भादवि और धारा 04 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया। न्यायालय ने नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का उदाहरण प्रस्तुत किया है। 2019 में दर्ज किया गया था मामला विशेष लोक अभियोजक मधु रानी ने अदालत में अभियोजन पक्ष के सभी तथ्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को दोषी ठहराया गया। यह मामला 2019 में दर्ज किया गया था, जब आरएस शिविर थाना पुलिस ने नाबालिग पीड़िता के अपहरण, व्यभिचार और बलात्कार के आरोप में भरत मंडल को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने त्वरित अनुसंधान कर चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपराध सिद्ध किया। जघन्य अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस न्यायालय ने सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए। मधुबनी जिले में बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग लगातार सक्रिय हैं। जिला पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि प्रभावी अनुसंधान और अभियोजन से अपराधियों को सजा दिलाना हमारी प्राथमिकता है। विशेष लोक अभियोजक मधु रानी ने भी इसे नाबालिगों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह सजा न केवल आरोपी के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज को भी संदेश देती है कि कानून का दंड निश्चित है। जिले में पॉक्सो मामलों की संख्या में कमी लाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस फैसले का समर्थन किया है। पुलिस ने अन्य लंबित मामलों में भी तेजी लाने का आश्वासन दिया है। मधुबनी जिला कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत एक महत्वपूर्ण फैसले में आरोपी भरत मंडल को 11 वर्ष की सश्रम कारावास और 11,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-VII, पॉक्सो कोर्ट, मधुबनी द्वारा आरएस शिविर थाना कांड संख्या 312/19 में सुनाया गया। भरत मंडल, पुत्र अशोक मंडल, ग्राम- दीप पश्चिम, थाना- आरएस शिविर, झंझारपुर, जिला- मधुबनी को धारा 363, 366(ए), 376 भादवि और धारा 04 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया। न्यायालय ने नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का उदाहरण प्रस्तुत किया है। 2019 में दर्ज किया गया था मामला विशेष लोक अभियोजक मधु रानी ने अदालत में अभियोजन पक्ष के सभी तथ्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को दोषी ठहराया गया। यह मामला 2019 में दर्ज किया गया था, जब आरएस शिविर थाना पुलिस ने नाबालिग पीड़िता के अपहरण, व्यभिचार और बलात्कार के आरोप में भरत मंडल को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने त्वरित अनुसंधान कर चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपराध सिद्ध किया। जघन्य अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस न्यायालय ने सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए। मधुबनी जिले में बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग लगातार सक्रिय हैं। जिला पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि प्रभावी अनुसंधान और अभियोजन से अपराधियों को सजा दिलाना हमारी प्राथमिकता है। विशेष लोक अभियोजक मधु रानी ने भी इसे नाबालिगों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह सजा न केवल आरोपी के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज को भी संदेश देती है कि कानून का दंड निश्चित है। जिले में पॉक्सो मामलों की संख्या में कमी लाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस फैसले का समर्थन किया है। पुलिस ने अन्य लंबित मामलों में भी तेजी लाने का आश्वासन दिया है।  

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