Diabetes and Sexual Health: डायबिटीज और दिल की बीमारी का असर सिर्फ शरीर तक ही सीमित नहीं रहता, ये आपकी ‘प्राइवेट लाइफ’ पर भी असर डाल सकती हैं। अक्सर लोग इस बारे में बात करने से हिचकते हैं, लेकिन सच ये है कि इन बीमारियों का सीधा असर यौन स्वास्थ्य पर पड़ता है।
छुपा हुआ कनेक्शन: क्रॉनिक बीमारी और यौन स्वास्थ्य
Dr. Narendra BS, एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज के विशेषज्ञ बताते हैं कि डायबिटीज और दिल की बीमारी शरीर में खून के प्रवाह, नसों और हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देती हैं। ये तीनों चीजें नॉर्मल सेक्स लाइफ के लिए बेहद जरूरी होती हैं। जब इनमें गड़बड़ी आती है, तो इंटिमेसी पर असर दिखने लगता है।
डायबिटीज का असर: धीरे-धीरे बढ़ती समस्या
डायबिटीज में लंबे समय तक हाई शुगर रहने से नसों और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है। पुरुषों में इससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन (इरेक्शन में दिक्कत) हो सकती है। वहीं महिलाओं में लुब्रिकेशन कम होना, उत्तेजना में कमी और संबंध के दौरान दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, थकान और कमजोरी भी इच्छा (लिबिडो) को कम कर देती है।
दिल की बीमारी और ब्लड फ्लो की दिक्कत
दिल की बीमारी का सबसे बड़ा असर खून के प्रवाह पर पड़ता है। जब शरीर के हिस्सों तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो परफॉर्मेंस और संतुष्टि दोनों प्रभावित होती हैं। कई बार यौन समस्या दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती है।
दवाओं का भी पड़ सकता है असर
डॉ. नरेंद्र बीएस के अनुसार, डायबिटीज और दिल की बीमारी में दी जाने वाली कुछ दवाएं भी साइड इफेक्ट के रूप में सेक्स ड्राइव को कम कर सकती हैं। खासकर ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं इच्छा और परफॉर्मेंस पर असर डालती हैं।
मानसिक असर को न करें नजरअंदाज
लंबे समय तक बीमारी रहने से तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। ये सभी चीजें रिश्तों और इंटिमेसी को और ज्यादा प्रभावित करती हैं। यानी समस्या सिर्फ शरीर की नहीं, दिमाग की भी होती है।
क्या करें? आसान उपाय
- शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें
- हेल्दी डाइट और नियमित एक्सरसाइज अपनाएं
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
- किसी भी समस्या पर डॉक्टर से खुलकर बात करें

समय रहते ध्यान देना है जरूरी
डॉ. नरेंद्र बीएस कहते हैं कि सही इलाज, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर ध्यान देने से न सिर्फ बीमारी कंट्रोल में रहती है, बल्कि आपकी लाइफ की क्वालिटी और रिश्तों में भी सुधार आता है। इसलिए अगर ऐसे संकेत दिखें, तो चुप रहने के बजाय समय रहते कदम उठाना ही समझदारी है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


