स्पाई थ्रिलर फिल्में इन दिनों भारतीय सिनेमा का पसंदीदा जॉनर बनी हुई हैं। जहाँ बॉलीवुड ‘स्पाई यूनिवर्स’ के जरिए बॉक्स ऑफिस पर राज कर रहा है, वहीं तमिल डायरेक्टर मनु आनंद अपनी फिल्म ‘Mr X’ के जरिए सीधे हॉलीवुड (जेम्स बॉन्ड और मिशन इम्पॉसिबल) को चुनौती देने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऊँची उड़ान भरने की कोशिश में यह फिल्म ज़मीन पर औंधे मुंह गिरती नज़र आती है।
क्या है कहानी?
फिल्म की कहानी किसी टिपिकल इंटरनेशनल स्पाई ड्रामा जैसी ही है। गौतम (आर्या) एक रॉ (RAW) एजेंट है जो चेन्नई में एक अंडरकवर मिशन पर है। मामला तब गंभीर हो जाता है जब ‘विलेन’ राणा के हाथ एक न्यूक्लियर डिवाइस लग जाता है, जिससे वह G20 समिट के दौरान चेन्नई को उड़ाने की योजना बनाता है।
इस विनाश को रोकने की ज़िम्मेदारी रॉ चीफ इंदिरा वर्मा (मंजू वारियर) और अनुभवी एजेंट Mr X (सरथकुमार) के कंधों पर है। वहीं अमरण (गौतम कार्तिक) इस खेल का वह मास्टरमाइंड है जो अंदरूनी तौर पर राणा की मदद कर रहा है। 2 घंटे 33 मिनट की इस फिल्म में पाकिस्तान से लेकर रूस तक की यात्रा और कई ट्विस्ट एंड टर्न्स दिखाए गए हैं।
लॉजिक की ‘लाइन’ टूटी
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी स्क्रिप्ट और लॉजिक है। निर्देशक चाहते हैं कि दर्शक अपना दिमाग घर छोड़कर आएं। फिल्म में इतने सारे सब-प्लॉट्स (पाकिस्तान से जंग, न्यूक्लियर कैप्सूल, अपनों का धोखा) हैं कि फिल्म खुद के बोझ तले दब जाती है। एक सीन में जब प्रधानमंत्री न्यूक्लियर हमले के खतरे के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें डरावने आंकड़ों के बजाय सिर्फ एक शब्द में जवाब मिलता है— “विनाशकारी”। फिल्म का प्रभाव भी कुछ ऐसा ही है—बड़े सेटअप लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं।
Mr X बहुत तेज़ी से एक ट्विस्ट से दूसरे ट्विस्ट की ओर बढ़ती है। हालांकि, असली ट्विस्ट यह है कि आपको सीन आने से कई घंटे पहले ही पता चल जाता है कि कौन पाला बदल रहा है। चेन्नई में RAW एजेंट्स के उस ग्रुप को ही ले लीजिए, जिनके प्लान पर बार-बार हमला होता रहता है। आपको पता होता है कि टीम में से कोई जानकारी लीक कर रहा है। आपको बस मेकर्स के यह बताने का इंतज़ार करना होता है कि ऐसा क्यों हो रहा है — और जब वे बताते हैं, तो उनकी वजह में कोई दम नहीं लगता।
यही इस फिल्म की सबसे बड़ी दिक्कत है। एक ज़बरदस्त स्पाई थ्रिलर में ऐसे ट्विस्ट होने चाहिए जिन पर आप सच में यकीन कर सकें। मनु आनंद कागज़ पर तो ट्विस्ट सही लिख लेते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी भरोसे लायक नहीं लगता। और जब वजह ही खोखली हो, तो ट्विस्ट का कोई मतलब नहीं रह जाता।
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फिल्म का सबसे अहम पल तब आता है जब प्रधानमंत्री न्यूक्लियर हमले से होने वाले नुकसान के बारे में पूछते हैं। यह एक ऐसा सीन है जिसे बहुत ही डरावने और विस्तार से यह बताना चाहिए था कि इस हमले का कितना बड़ा खतरा है। इसके बजाय, इसका जवाब सिर्फ़ एक शब्द है: “विनाशकारी।” संक्षेप में कहें तो Mr X यही है — बड़े-बड़े सेटअप, लेकिन नतीजा कुछ नहीं।
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प्रेडिक्टेबल ट्विस्ट्स
फिल्म में सस्पेंस बनाए रखने के लिए कई ट्विस्ट डाले गए हैं, लेकिन समस्या यह है कि दर्शक को ट्विस्ट आने से आधे घंटे पहले ही पता चल जाता है कि अगला गद्दार कौन होने वाला है। मेकर्स ने किरदारों के पाला बदलने की जो वजहें बताई हैं, वे बेहद खोखली और अविश्वसनीय लगती हैं।
एक्टिंग और तकनीकी पक्ष
आर्या: पूरी फिल्म में एक ही तरह के हाव-भाव (Sullen expression) के साथ नज़र आते हैं। उनके किरदार में वह गहराई नहीं दिखी जो एक टॉप एजेंट में होनी चाहिए।
गौतम कार्तिक: उनके चेहरे पर एक कभी न खत्म होने वाली मुस्कान है, जो कई गंभीर दृश्यों में अजीब लगती है।
मंजू वारियर: रॉ चीफ के तौर पर उन्होंने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है। वह पूरी कास्ट में सबसे दमदार नज़र आती हैं।
सिनेमैटोग्राफी: अरुल विंसेंट का काम काबिले तारीफ है। रूस और भारत के नज़ारों को उन्होंने जिस तरह कैमरे में उतारा है, वह फिल्म को एक ‘इंटरनेशनल लुक’ देता है।
म्यूजिक: धिबू निनन थॉमस का बैकग्राउंड स्कोर तेज़ है, लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि वह स्क्रिप्ट की कमियों को शोर से ढकने की कोशिश कर रहा है।
‘Mr X’ अपने सीक्वल के लिए भी दरवाज़े खोलती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या दर्शक दोबारा इस ‘मिसफायर’ स्पाई थ्रिलर को देखना चाहेंगे? अगर आप केवल अच्छी लोकेशन और बंदूकों की लड़ाई देखना पसंद करते हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं। लेकिन यदि आप एक बुद्धिमान और सस्पेंस से भरी थ्रिलर की तलाश में हैं, तो ‘Mr X’ आपको निराश करेगी।
फिल्म: Mr X
निर्देशक: मनु आनंद
कलाकार: आर्या, गौतम कार्तिक, मंजू वारियर, सरथकुमार
रेटिंग: 2/5


