चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पुनर्जीवन, सीवेज प्रबंधन और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर 25 और 26 अप्रैल को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। आरोग्यधाम सभागार में होने वाले इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नदी के अविरल प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन को बहाल करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन के स्वागत उद्बोधन से होगा। इसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल, संयुक्त सचिव जैघम खान, अमृत मिशन की अपर सचिव डी. थारा और मध्यप्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे। पर्यावरण, वन, नगरीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित चित्रकूट में बढ़ते मानवीय दबाव, सीवेज प्रदूषण और मौसमी बाढ़ के कारण मंदाकिनी नदी की पारिस्थितिकी लगातार प्रभावित हो रही है। इन चुनौतियों के समाधान के लिए एक बहु-क्षेत्रीय और समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है। दो दिवसीय आयोजन के दौरान, विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्रों की स्थापना के लिए 12 संभावित स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ब्रह्मकुंड, बरहा, किल्होरा से रामघाट तक मंदाकिनी-पैसुनि नदी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया जाएगा। इस दौरान नालों और प्रदूषण स्रोतों की पहचान के साथ-साथ घाटों पर ठोस अपशिष्ट और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की समीक्षा भी की जाएगी। जैव विविधता पार्क, आर्द्रभूमि विकास, घासभूमि संरक्षण और बाढ़ जोखिम कम करने के लिए जलग्रहण क्षेत्र की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। फील्ड सर्वे के बाद, विशेषज्ञ तकनीकी मंथन करेंगे और मंदाकिनी पुनर्जीवन के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेंगे।


