भारत में संक्रामक बीमारियां घटीं, लेकिन ये 5 साइलेंट किलर बन रही है नई आफत, सर्वे में हुआ खुलासा

भारत में संक्रामक बीमारियां घटीं, लेकिन ये 5 साइलेंट किलर बन रही है नई आफत, सर्वे में हुआ खुलासा

Lifestyle Diseases vs Infections: भारत में स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक बदलाव देखा जा रहा है। हालिया नेशनल हेल्थ सर्वे और ‘द लांसेट’ (The Lancet) की रिपोर्ट्स एक चौकाने वाली हकीकत बयां कर रही हैं। भारत अब ‘इन्फेक्शन’ (संक्रामक बीमारियों) से ज्यादा लाइफस्टाइल (जीवनशैली) से जुड़ी बीमारियों की गिरफ्त में है।

जहां पहले मलेरिया, टीबी और हैजा जैसी बीमारियां भारत की सबसे बड़ी चुनौती थीं, वहीं अब डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसे ‘साइलेंट किलर्स’ देश के हर घर में दस्तक दे रहे हैं।

क्या कहती है रिसर्च? (Key Findings)

द लांसेट (The Lancet) की स्टडी: एक व्यापक शोध के अनुसार, भारत में कुल मौतों में से 60% से अधिक मौतें अब गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) के कारण हो रही हैं। यह आंकड़ा 1990 के दशक के मुकाबले लगभग दोगुना हो गया है।

ICMR और इंडिआब (INDIAB) रिपोर्ट: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज के मरीज हैं और 13 करोड़ से ज्यादा लोग प्री-डायबिटीज की श्रेणी में हैं। यह दर्शाता है कि भारत ‘दुनिया की डायबिटीज राजधानी’ बनने की ओर अग्रसर है।

Lifestyle Diseases in India
Lifestyle Diseases in India

NFHS-5 (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे): इस सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि संक्रामक बीमारियों जैसे निमोनिया और डायरिया के मामलों में भारी गिरावट आई है, जिसका श्रेय बेहतर स्वच्छता और टीकाकरण को जाता है। लेकिन इसी दौरान मोटापे (Obesity) और हाइपरटेंशन के मामलों में 15-20% का उछाल आया है।

Lifestyle Diseases in India
Lifestyle Diseases in India

क्यों बदल रहा है मौत का कारण?

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण हमारी ‘सेडेंटरी लाइफस्टाइल’ (शारीरिक सक्रियता की कमी) है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड: अधिक नमक, चीनी और पैकेट बंद खाने का सेवन बीपी और वजन बढ़ा रहा है।

तनाव और नींद की कमी: शहरी जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव सीधे तौर पर दिल की बीमारियों (Cardiovascular diseases) को न्योता दे रहे हैं।

प्रदूषण: यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की एक रिसर्च के मुताबिक, प्रदूषण अब फेफड़ों के इन्फेक्शन से ज्यादा ‘स्ट्रोक’ और ‘हार्ट फेलियर’ का कारण बन रहा है।

इन्फेक्शन से मिली जीत, लेकिन लाइफस्टाइल से हार?

अच्छी खबर यह है कि भारत ने पोलियो को खत्म किया और टीबी व मलेरिया पर काफी हद तक काबू पा लिया है। सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत और स्वच्छ भारत ने इन्फेक्शन से होने वाली मौतों को कम किया है। लेकिन चुनौती अब बदल गई है। लाइफस्टाइल बीमारियां मल्टी-फैक्टोरियल होती हैं, यानी इन्हें सिर्फ एक इंजेक्शन या दवा से ठीक नहीं किया जा सकता। इनके लिए पूरे जीवन के ढर्रे को बदलना पड़ता है।

एक्सपर्ट की चेतावनी: अब क्या है रास्ता?

मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश त्रेहन के अनुसार “हम संक्रामक रोगों से तो जीत रहे हैं, लेकिन अपनी थाली और सोफे से हार रहे हैं। आज 25 से 30 साल के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं, जो एक गंभीर राष्ट्रीय संकट है।”

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *