पेट साफ न होना मामूली नहीं, किडनी पर मंडरा रहा है खतरा! जानें क्या होता है ऑटो-इंटॉक्सिकेशन

पेट साफ न होना मामूली नहीं, किडनी पर मंडरा रहा है खतरा! जानें क्या होता है ऑटो-इंटॉक्सिकेशन

Constipation Side Effects: अक्सर हम इस बात पर माथापच्ची करते हैं कि क्या खाएं और क्या न खाएं। लेकिन, साइंस कहती है कि आप जो खा चुके हैं, वो कितनी जल्दी शरीर से बाहर निकलता है, यह उससे भी ज्यादा जरूरी है। हाल ही में हुई एक बड़ी रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अगर मल (Poop) आपके शरीर में ज्यादा देर तक टिका रहता है, तो यह अंदर ही अंदर आपके अंगों को बीमार करना शुरू कर देता है।

आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह नई रिसर्च क्या कहती है?

क्या कहती है रिसर्च? (The Research)

वॉशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स बायोलॉजी ने करीब 1,400 लोगों के डेटा का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जब खाना आंतों में बहुत देर तक रहता है, तो हमारे गट बैक्टीरिया (पेट के कीटाणु) खाने को फर्मेंट करने के बजाय उसमें मौजूद प्रोटीन को सड़ाने लगते हैं। इस सड़न से पी-क्रेसोल और इंडोक्सिल सल्फेट जैसे खतरनाक टॉक्सिन्स बनते हैं, जो शरीर के लिए किसी जहर से कम नहीं हैं।

क्या होता है ऑटो-इंटॉक्सिकेशन (Auto-intoxication)?

ऑटो-इंटॉक्सिकेशन का मतलब है कि जब कचरा बाहर नहीं निकलता, तो आंतें उसमें मौजूद गंदगी और जहरीले रसायनों को वापस सोखने लगती हैं। आंतों में मौजूद बैक्टीरिया खाने के अवशेषों को तोड़कर जहरीली गैसें और एसिड बनाने लगते हैं। ये टॉक्सिन्स आंतों की दीवारों से होते हुए सीधे आपके ब्लडस्ट्रीम (खून) में मिल जाते हैं, जिससे आप हर वक्त थकान, सिरदर्द और भारीपन महसूस करते हैं। यह स्थिति लंबे समय में अंगों के फेल होने का कारण भी बन सकती है।

किन रोगों का है खतरा? (Risk of Diseases)

1. किडनी की बीमारी का खतरा।
2. लिवर पर लोड।
3. क्रोनिक सूजन (Inflammation)।
4. स्किन प्रॉब्लम।
5. कैंसर का रिस्क।

कैसे रखें पेट को फिट?

  • दलिया, ओट्स, कच्ची सब्जियां और फल खाएं।
  • दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं।
  • खाने के बाद सैर करें।
  • शरीर को एक निश्चित समय पर पेट साफ करने की आदत डालें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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