हल्दीराम मूलचंद अस्पताल में मरीज बेहाल:आपातकालीन वार्ड में 6 एसी लगे हैं लेकिन पंखा तक नहीं चल रहा; रात में 27 डिग्री पारे में मरीज परेशान

हल्दीराम मूलचंद अस्पताल में मरीज बेहाल:आपातकालीन वार्ड में 6 एसी लगे हैं लेकिन पंखा तक नहीं चल रहा; रात में 27 डिग्री पारे में मरीज परेशान

बीकानेर शहर के हल्दीराम मूलचंद अस्पताल, जिसे कभी अत्याधुनिक सुविधाओं वाला ‘प्राइवेट जैसा’ सरकारी अस्पताल बताया गया था, उसकी जमीनी हकीकत अब सवालों के घेरे में है। मंगलवार रात का नजारा चौंकाने वाला रहा, जब आपातकालीन वार्ड में छह एसी लगे होने के बावजूद मरीजों और उनके परिजनों को एक पंखा तक नसीब नहीं हुआ। अस्पताल में भर्ती अधिकांश मरीज गंभीर और अतिसंवेदनशील स्थिति में हैं, इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। बीकानेर में जब रात का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, तब भी वार्डों में देर रात तक पंखे बंद पड़े रहे और मरीज गर्मी से बेहाल रहे। उपकरण हैं, देखरेख नहीं निजी कंपनी हल्दीराम परिवार की ओर से अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन उनकी देखरेख और संचालन में भारी लापरवाही सामने आ रही है। अधिकांश वार्डों में पंखे खराब हैं, लिफ्ट अक्सर बंद रहती है और सफाई व्यवस्था को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। गेट बंद, मरीज परेशान सुरक्षा व्यवस्था भी मरीजों के लिए परेशानी बन रही है। अस्पताल में पर्याप्त गार्ड होने के बावजूद दोपहर के समय मुख्य गेट बंद कर दिया जाता है, जिससे परिजनों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है और उन्हें लंबा चक्कर लगाकर रिसेप्शन तक पहुंचना पड़ता है। जवाबदेही पर उठते सवाल जहां इलाज के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी होती हैं, वहां इस तरह की अव्यवस्थाएं कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं, क्या उपकरण सिर्फ दिखावे के लिए हैं? उनकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है? क्या मरीजों की तकलीफ किसी को दिखाई नहीं देती? संसाधन की कमी नहीं हल्दीराम परिवार की ओर से यहां संसाधनों की कमी नहीं, लेकिन जवाबदेही और संवेदनशीलता की कमी साफ नजर आ रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह की लापरवाही सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि मरीजों की जान पर भी भारी पड़ सकती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब और कितना गंभीर कदम उठाते हैं।

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