Heart Attack Symptoms in Women: जब भी हार्ट अटैक की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सीने में तेज दर्द और पसीने से लथपथ व्यक्ति की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महिलाओं के मामले में यह तस्वीर पूरी तरह अलग हो सकती है? मेडिकल रिसर्च के अनुसार, महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण इतने सूक्ष्म और अलग होते हैं कि उन्हें अक्सर ‘सामान्य थकान’, ‘तनाव’ या ‘एसिडिटी’ समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही कारण है कि महिलाओं में हार्ट अटैक आने पर अस्पताल पहुँचने में देरी होती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
पुरुषों से अलग क्यों हैं महिलाओं के लक्षण?
American Heart Association (AHA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में आमतौर पर मुख्य धमनियों में ब्लॉकेज होता है, जिससे सीने में तेज दबाव महसूस होता है। वहीं, महिलाओं में अक्सर छोटी रक्त वाहिकाओं (Microvascular disease) में समस्या होती है। इस कारण उन्हें सीने में “कुचलने वाला दर्द” होने के बजाय शरीर के अन्य हिस्सों में असहजता महसूस होती है।
पुरुष बनाम महिला: हार्ट अटैक के लक्षण

महिलाओं के लिए 5 ‘रेड फ्लैग’ संकेत (Red Flags)
- जबड़े, गर्दन या ऊपरी पीठ में दर्द: महिलाओं में हार्ट अटैक का दर्द सिर्फ सीने तक सीमित नहीं रहता। यह अक्सर जबड़े की हड्डियों, गर्दन या पीठ के ऊपरी हिस्से में खिंचाव या दर्द के रूप में महसूस होता है।
- अत्यधिक और असामान्य थकान: अगर आप बिना किसी भारी शारीरिक काम के कई दिनों से ऐसी थकान महसूस कर रही हैं कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो रहा है, तो यह दिल की कमजोरी का संकेत हो सकता है।
- सांस फूलना और बेचैनी: बिना किसी कारण के सांस लेने में तकलीफ होना या अचानक ऐसा महसूस होना जैसे आपने अभी-अभी दौड़ लगाई हो, हार्ट अटैक का एक साइलेंट संकेत है।
- ठंडा पसीना और मतली (Nausea): फ्लू जैसे लक्षण, अचानक ठंडा पसीना आना और उल्टी जैसा महसूस होना महिलाओं में हार्ट अटैक के आम लेकिन नजरअंदाज किए जाने वाले लक्षण हैं।
- पेट में जलन और भारीपन: कई महिलाएं इसे ‘बदहजमी’ या ‘एसिडिटी’ समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यह दिल के निचले हिस्से में हो रही हलचल का संकेत हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह: कब हो जाएं सतर्क?
कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि महिलाओं को अपने शरीर की ‘भाषा’ समझनी चाहिए। कार्डियक सर्जन डॉ. देवी शेट्टी ने बताया कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों जैसे ‘क्लासिक’ नहीं होते। उन्हें अक्सर सीने में तेज दर्द के बजाय केवल गर्दन, जबड़े या ऊपरी पीठ में भारीपन और खिंचाव महसूस हो सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारतीय महिलाएं अक्सर इसे ‘सर्वाइकल’ या ‘कमजोरी’ समझकर घरेलू उपचार में समय बर्बाद कर देती हैं। मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलावों के कारण यह जोखिम और भी बढ़ जाता है, इसलिए किसी भी असामान्य बेचैनी या अचानक आने वाले ठंडे पसीने को हल्के में न लें।
बचाव के लिए क्या करें?
- साल में कम से कम एक बार अपनी Lipid Profile और ECG जरूर कराएं।
- यदि परिवार में हार्ट डिजीज की हिस्ट्री है, तो 35 की उम्र के बाद अधिक सतर्क रहें।
- अचानक पसीना आने या घबराहट होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


