मेडिकल क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच ऑर्थोपेडिक उपचार पद्धतियों में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कई बीमारियों में जहां पहले सर्जरी या जॉइंट रिप्लेसमेंट ही एकमात्र विकल्प माना जाता था, अब वहां ओजोन थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकें मरीजों को जटिल सर्जरी से बचाने का विकल्प दे रही हैं। यह जानकारी केरल के सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रकाश ने इंदौर में आयोजित तीन दिनी 5वीं इंटरनेशनल ऑर्थोपेडिक कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन दी। कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में एक्सपर्टस ने बताया कि अब कई ऑर्थोपेडिक बीमारियों में सर्जरी अंतिम विकल्प नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीकों और वैकल्पिक उपचार पद्धतियों से मरीजों को कम जोखिम, कम दर्द और शीघ्र रिकवरी का लाभ मिल सकता है। लर्न टुडे इम्पलीमेंट टूमारओ कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अरविंद वर्मा जांगिड़ ने बताया कि इस आयोजन की थीम “लर्न टुडे इम्पलीमेंट टूमारओ” रखी गई थी। इसका उद्देश्य नई चिकित्सा तकनीकों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर तुरंत व्यवहार में लाना है। तीन दिनों तक चले इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के सैकड़ों सर्जन्स ने भाग लिया। प्रतिभागियों को विभिन्न आधुनिक तकनीकों पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे अपने-अपने अस्पतालों में लौटते ही इनका उपयोग शुरू कर सकें। इंदौर में जल्द शुरू होगी ओजोन थेरेपी डॉ. जांगिड़ ने बताया कि वर्तमान में इंदौर में ओजोन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसे जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय मरीजों को भी आधुनिक और कम जटिल उपचार का लाभ मिल सकेगा। एक्सपर्टस का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलता है और मरीजों को अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना संभव हो पाता है।


