Sinking Iranian Warship Story: श्रीलंका के पास हिंद महासागर में अमेरिका द्वारा किए गए हमले में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena डूब गया था। इस हमले में चालक दल के 104 सदस्यों की मौत हो गई थी। अब इस घटना में जीवित बचे एक घायल नाविक, हामिद मोमेनेह ने उस भयावह रात का आंखों देखा हाल सुनाया है। नाविक का दावा है कि अमेरिकी हमले का मुख्य उद्देश्य केवल जहाज को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उस पर मौजूद सभी कर्मियों की जान लेना था। उन्होंने बताया कि यह हमला बिना किसी पूर्व चेतावनी के किया गया था।
बिना चेतावनी के अचानक किया हमला
घायल नाविक हामिद मोमेनेह ने बताया कि यह हमला रात करीब 3:00 से 3:30 बजे के बीच हुआ। उन्होंने कहा, ‘हम पर अचानक हमला किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पूरी तरह खिलाफ था। वह कोई युद्ध क्षेत्र नहीं था और हमें हमले से पहले कोई चेतावनी भी नहीं मिली थी।’ उन्होंने बताया कि यह हमला पनडुब्बी से किया गया था। जब पहला टारपीडो जहाज से टकराया, तब सभी कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर तैनात थे।
जहाज छोड़ने को तैयार नहीं थे, नाविक
मोमेनेह ने बताया की जहाज पर कुल 104 चालक दल के सदस्य मौजूद थे और कोई भी जहाज छोड़कर नहीं भागा। उन्होंने कहा, ‘हर कोई अंत तक अपनी जगह पर डटा रहा’ नाविक ने इस बात पर जोर दिया कि उनके लिए युद्धपोत ‘देना’ ईरान की मिट्टी की तरह था और उसे छोड़कर जाने का उनके लिए कोई मतलब नहीं था। सभी जवान रात 11 बजे तक जहाज पर थे।
ईरानी सैनिकों की जान लेना था मुख्य लक्ष्य
जीवित बचे नाविक ने अमेरिकी इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनका लक्ष्य केवल जहाज को नुकसान पहुंचाना होता, तो वे दूसरे हिस्सों को निशाना बना सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया, ‘उनका मुख्य लक्ष्य चालक दल को मारना था’ इसके बावजूद ईरानी सैनिकों ने हार नहीं मानी। जब स्थिति बहुत खराब हो गई, तब जवानों को समुद्र में काफी दूरी तक तैरना पड़ा ताकि वे श्रीलंका के तटीय इलाकों के करीब पहुंच सकें।
जानिए पूरी घटना
IRIS Dena को 4 मार्च को श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर एक अमेरिकी पनडुब्बी से दागे गए MK-48 टारपीडो द्वारा निशाना बनाया गया था। यह जहाज भारत के बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ में हिस्सा लेने के बाद अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लौट रहा था। इस घटना में कुल 104 चालक दल के सदस्यों की जान चली गई, जिनमें से 87 शव बरामद किए गए और 32 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया।


