12वीं के बाद इन फील्ड्स में बना सकते हैं भविष्य, बोर्ड में कम मार्क लाने वालों के लिए भी बेस्ट हैं ये फिल्ड

12वीं के बाद इन फील्ड्स में बना सकते हैं भविष्य, बोर्ड में कम मार्क लाने वालों के लिए भी बेस्ट हैं ये फिल्ड

Career Options After 12th: कक्षा 12वीं के बाद अक्सर स्टूडेंट्स इस कंफ्यूजन में रहते हैं कि वे कौन सा सब्जेक्ट चुनें जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। अक्सर स्टूडेंट्स और अभिभावकों का झुकाव मेडिकल या इंजीनियरिंग की ओर ही होता है। आज के बदलते दौर में करियर के कई ऑफबीट और दिलचस्प ऑप्शन भी मौजूद हैं, जहां आप नाम और पैसा दोनों कमा सकते हैं। आपके लिए सही करियर कौन सा है यह आपके इंट्रेस्ट पर डिपेंट करता है।

सोच-समझ कर करें फील्ड सिलेक्शन

किसी भी  कोई भी फील्ड सेलेक्ट करने से पहले उसके बारे में ठीक से रिसर्च कर लें। यह समझें कि उस क्षेत्र में प्रवेश कैसे मिलेगा, आगे ग्रोथ के क्या चांस हैं, पढ़ाई किस तरह की होगी और नौकरी के क्या ऑप्शन मौजूद हैं। बिना जानकारी के लिया गया फैसला भविष्य में नुकसान पहुंचा सकता है।

करियर काउंसलर भी स्टूडेंट्स को सलाह देते हैं कि किसी के दबाव में आकर करियर चुनने के बजाय आप अपने स्वविवेक से सब्जेक्ट और करियर ऑप्शन का चुनाव करें।

इन ऑफबीट फील्ड्स में हैं शानदार करियर

छात्र अपनी रुचि के अनुसार इन उभरते हुए क्षेत्रों में हाथ आजमा सकते हैं। यहां बोर्ड परीक्षा में कम नंबर लाने वालों को भी मौका मिलता है:

  • आर्ट्स और डिजाइन: डायरेक्शन, आर्ट डायरेक्शन, डिजाइन और कम्यूनिकेशन डिजाइन।
  • मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट: ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट, इंश्योरेंस और कॉर्पोरेट इंटेलीजेंस।
  • इतिहास और संरक्षण: आर्कियोलॉजी, म्यूसिओलॉजी, मॉन्यूमेंट्स एंड स्कल्पचर रिस्टोरेशन।
  • हेल्थ और सोशल वर्क: फिजियोथेरेपी, रिहेबिलेशन साइकोलॉजी, स्पीच और लैंग्वेज थेरेपी, स्पेशल एजुकेटर और वोकेशनल काउंसलर।
  • मीडिया और विज्ञापन: एडवर्टाइजिंग, पब्लिक रिलेशन और इंफॉर्मेशन कम्यूनिकेशंस।

डिग्री ही नहीं स्किल्स भी है जरूरी

स्टूडेंट्स को यह समझना होगा कि किसी भी फील्ड में सफलता पाने के लिए महज़ कागज की डिग्री काफी नहीं है। आपके अंदर उस काम से जुड़ी स्किल्स भी होनी चाहिए। अगर आपने 10वीं या 12वीं में कम स्कोर किया है तो भी बहुत परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। पेशेवर दुनिया में एक समय के बाद कोई आपके स्कूल के नंबर नहीं पूछता, वहां केवल आपका काम और मेहनत बोलती है। इसलिए “सुनो सबकी, करो मन की” सभी की सलाह, राय और अनुभवों को ध्यान से सुनें और समझें, लेकिन निर्णय अपने विवेक और अंतरात्मा की आवाज पर लें।

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