उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा लगातार दो दिनों तक चली। वाराणसी समेत 8 शहरों में बने परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। शहर के परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने वालों में तमाम ऐसे अभ्यर्थी रहे जो काफी समय से सरकारी नौकरी में हैं लेकिन अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए परीक्षा देने पहुंचे थे। कुछ परिषदीय स्कूलों में ताे कुछ इंटर कालेजों में शिक्षक हैं। खास बात यह है कि परीक्षा केंद्रों पर वह भी परीक्षार्थी बनकर पहुंचे थे अपनी नौकरी से रिटायर होने वाले हैं। 50 से 55 वर्ष तक की उम्र वाले भी परीक्षार्थी बने दिखे। लेक्चरर के बाद अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनना है डॉ. प्रदीप नारायण शुक्ला राजकीय इंटर कालेज, चित्रकूट में टीचर हैं। वह भी वाराणसी के एक केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति अपने बेहतर कॅरियर की तलाश हमेशा करता रहता है। इंटर कॉलेज से डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की इच्छा लेकर इस परीक्षा को दिया हूं। डॉ. ज्योति यादव प्रवक्ता हैं। उन्हाेंने कहा, नौकरी के साथ साथ मैं समय निकालकर तैयारी भी करती रही। अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए इस परीक्षा में शामिल हूं। इसी तरह प्रयागराज की स्वाति द्विवेदी लेक्चरर हैं, इसके बावजूद वह इस परीक्षा में शामिल हुईं। इसी तरह अभिनव तिवारी देवरिया के रहने वाले हैं। उन्होंने पिछले दिनों पीसीएस मेंस की परीक्षा दी थी। वह कहते हैं कि अभी ताे नौकरी की तलाश है, हर परीक्षा दे रहा हूं, ताकि कहीं सलेक्शन हो जाए। पिछले वर्ष रद्द हो गई थी यह परीक्षा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने विज्ञापन संख्या-51 के तहत एडेड डिग्री कालेजों में 910 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए 16 और 17 अप्रैल 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित कराई थी। भर्ती के लिए करीब 82 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा के तुरंत बाद से ही बड़े पैमाने पर धांधली, नकल और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आने लगी थीं। अभ्यर्थी परीक्षा काे रद्द कराने की मांग करते रहे। जांच कराई गई तो इसमें बड़ा खुलासा हुआ था। इसके बाद STF ने फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार कर लिया था। इस परीक्षा बिना किसी विवादों के संपन्न हुई।


