वाराणसी में नेटवर्किंग कंपनी का आफिस बनाकर जालसाजों ने गैर प्रदेशों के 500 से अधिक युवक, युवतियों और नाबालिगों को बंधक बनाकर रखा है। महीनों से नेटवर्क कंपनी की आड़ में युवक-युवतियों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है। उन्हें ट्रेनिंग के नाम पर कंपनी के लिए जालसाजी सिखाई जाती है और फिर कमरों में बंद कर दिया जाता है। कंपनी की ओर से लिए गए हर कमरे में 20 से 25 नाबालिगों को रखा जाता है। इसके बाद उन्हें आधा पेट खाना दिया जाता है और विरोध करने पर पीटा जाता है। कई दिनों के टार्चर के बाद उन्हें घर जाने नहीं दिया जाता है, घर जाने की बात पर उनसे परिचितों और दोस्तों की लिस्ट बनवाई जाती है। इसके साथ ही उन्हें बुलाकर कंपनी में ज्वानिंग कराने और रुपये लेने का दबाव बनाया जाता है। युवक और युवतियों की सूची से मिले नंबरों पर काल करके उन्हें फर्टीलाइजर कंपनी और हेल्थ कंपनी में नौकरी का लालच देकर फंसाया और गुमराह कर बुलाया जाता है फिर बंधक बना लेते हैं। जालसाजों के चंगुल से छिपकर निकले चार युवक पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और आप बीती सुनाई। साथ ही स्थानीय पुलिस पर भी मिलीभगत और सूचना के बाद सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। दैनिक भास्कर की टीम जब मौके पर पहुंची तो जालसाज ताला लगाकर भाग निकले। हालांकि एक कमरे में चंद लोग मिले जो कुछ भी बताने से इनकार करते रहे। पहले जानिए चंगुल से भागकर निकले पीड़ितों की दास्तां वाराणसी कमिश्नर कार्यालय में चार-पांच युवकों ने 500 युवक और युवतियों समेत कई नाबालिकों को बंधक बनाने का मामला सामने आया। ये कंपनी रायल हेल्थ इण्डिया नेटवर्किंग के नाम पर वाराणसी के ग्रामीण इलाके में संचालित है और इसके आफिस-आवास में कई युवक जबरन रखे जाने की बात पता चली। बिहार सिवान निवासी शिवम कुमार श्रीवास्तव पुत्र राजन श्रीवास्तव( 20 वर्ष) और सुमित कुमार पुत्र रामबाबु भगत (18 वर्ष), जमुई जिला गढ़वा झारखण्ड निवासी शिवम विश्वकर्मा पुत्र गोपाल विश्वकर्मा ( 20 वर्ष) और बलराम कुमार पुत्र प्रदीप प्रसाद, आर्यन विश्वकर्मा पुत्र विनोद विश्वकर्मा ने सीपी को शिकायती पत्र दिया। युवकों ने खुद को पीड़ित बताकर चंगुल से छूटने की बात कही। बताया कि उनकी एक करीबी ने कंपनी में ज्वाइंनिग के नाम पर बनारस बुलाया और धोखेबाज कंपनी में फंसा दिया। पहले नई आईडी खोलने के नाम पर बड़ी राशि ली और बाद में उसे पूरा करन के लिए दबाव बनाया। युवकों से परिचितों और रिश्तेदारों का अकाउंट खुलवाने पर जाने की बात कही। इसके बाद सभी को कमरों में बंद कर दिया । सभी युवकों ने कैंपस में मौजूद युवतियों से अनैतिक कार्य की भी आशंका जताई। कम्पनी के स्टाफ उनसे मारपीट और अभद्रता करते हैं । उनके द्वारा मौका पाकर साथ शारीरिक शोषण की भी आशंक जताई है। पहले परिचितों-परिजनों और दोस्तों को बनाया निशाना देश की एक कंपनी में नौकरी करने वाले युवकों ने रोहनिया थाना के क्षेत्र में लठिया चौरहा स्थित बिल्डिंग में नेटवर्क कपंनी का अपना आफिस बनाया और फजीवाड़े से ज्वानिंग शुरू कर दिया। गैर प्रदेशों के युवकों को फंसाया फिर उनके दास्तों को बुलवाया और सभी को बंधक बना लिया। सभी युवकों ने बताया कि उन्हें कुछ दिन पहले दोस्तों के जरिए रायल हेल्थ इण्डिया नेटवर्किंग कार्य के लिए बुलाया गया था। ज्वानिंग के नाम रुपये भी जमा करवाए फिर ट्रेनिंग के नाम पर ब्रेनवॉश कर दिया। शिवम विश्वकर्मा
से 29,000, बलराम से 25,000 रुपये आर्यन से 25,000, सुमित से 25,000 और शिवम श्रीवास्तव 25,000 रुपये कम्पनी के मालिक उनके स्टाफों ने लिया। नौकरी की आस में घर से दूर आकर अपना सब कुछ गवां बैठे और अब जाने के लिए ना किराया है ना खाने के लिए रोटी। मोहताज होकर खाना खाया और फिर अपनी पूरी आपबीती बताई। आरोप लगाया कि कम्पनी में ज्वाइन की औपचारिकताएं निभाने के बाद उनको प्रताड़ित किया जाने लगा उनको ढंग से खाने को नहीं मिलता था न ही नहाने धोने को मिलता है और विरोध करने पर मारते पीटते थे। सभी ने बताया कि बंधक बनाकर कार्य करवाते हैं और कम्पनी ने तीन माह से एक रूपया भी नहीं दिया गया। उसी कम्पनी में नाबालिग और बालिग लड़कियों को रखा गया है। इन सभी बहला-फुसलाकर उनसे भी पैसा लेकर काम भी कराते है और काम का पैसा भी नहीं देते है, कम्पनी के मालिक व स्टाफों द्वारा उन लड़कियों के साथ शारीरिक शोषण भी किया जाता है। 16 अप्रैल को मौका पाकर उन लोगों ने बैकअप प्लान तैयार किया और 112 नम्बर पर फोन किया । सूचना के बाद पुलिस भी आयी थी लेकिन पीड़ितों की मदद की जगह टार्चर बढ़वा दिया। सभी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बताया गया कि युवक-युवतियों को फंसाने का पैटर्न नहीं करने वाले को बाहर निकलने तक नहीं दिया जाता है। हालांकि पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।


