पंडितों को दिलाई बाल विवाह नहीं कराने की शपथ:समस्तीपुर के मंदिरों में अक्षय तृतीया पर जागरूकता कार्यक्रम, नजर रखने के लिए वॉलिंटियर तैनात

पंडितों को दिलाई बाल विवाह नहीं कराने की शपथ:समस्तीपुर के मंदिरों में अक्षय तृतीया पर जागरूकता कार्यक्रम, नजर रखने के लिए वॉलिंटियर तैनात

समस्तीपुर में अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन के साथ समाजिक संगठनों की ओर से आज जिले के अलग-अलग मंदिरों में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सामाजिक संगठनों की टीमों की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में भी रैली निकाली गई। ग्रामीणों के बीच जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन के साथ जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू, महिला एवं बाल विकास निगम, जिला बाल संरक्षण इकाई की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र पंचायतों के अलावा धर्मगुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों, मंदिरों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है । बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। बाल विवाह को नहीं किया जाएगा स्वीकार सचिव सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे संगठित और सामाजिक अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है। लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत् दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है। रविवार को जिले के विद्यापति धाम, खुदनेश्वर स्थान, थानेश्वर स्थान, शिवालय, श्रीराम जानकी मंदिर में जाकर जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. दीप्ति कुमारी, जिला कार्यक्रम समन्वयक काजल राज, लेखा पदाधिकारी पप्पू यादव के नेतृत्व में जन जागरण किया है। लोगों से बाल विवाह रोकने में सहयोग की अपील की। समस्तीपुर में अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन के साथ समाजिक संगठनों की ओर से आज जिले के अलग-अलग मंदिरों में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सामाजिक संगठनों की टीमों की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में भी रैली निकाली गई। ग्रामीणों के बीच जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन के साथ जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू, महिला एवं बाल विकास निगम, जिला बाल संरक्षण इकाई की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र पंचायतों के अलावा धर्मगुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों, मंदिरों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है । बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। बाल विवाह को नहीं किया जाएगा स्वीकार सचिव सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे संगठित और सामाजिक अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है। लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत् दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है। रविवार को जिले के विद्यापति धाम, खुदनेश्वर स्थान, थानेश्वर स्थान, शिवालय, श्रीराम जानकी मंदिर में जाकर जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. दीप्ति कुमारी, जिला कार्यक्रम समन्वयक काजल राज, लेखा पदाधिकारी पप्पू यादव के नेतृत्व में जन जागरण किया है। लोगों से बाल विवाह रोकने में सहयोग की अपील की।  

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