लखनऊ के गोमती नगर स्थित जैन मंदिर में अक्षय तृतीया का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान ऋषभदेव का अभिषेक और पूजन किया गया, जिसके साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में मुख्य शांति धारा पीसी जैन मंडी और डॉ. सारांश जैन परिवार द्वारा की गई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर भक्ति संगीत और मंत्रोच्चार से गूंज उठा।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान ऋषभदेव ने 13 महीने की कठोर तपस्या के उपरांत मुनि अवस्था में हस्तिनापुर के राजा श्रेयांश से गन्ने के रस के रूप में अपना प्रथम आहार ग्रहण किया था। इसी घटना को इस युग में दान की परंपरा की शुरुआत माना जाता है। दान से धर्म साधना को बढ़ावा मिलता है अभिषेक जैन ने बताया कि जैन धर्म में दान को विशेष महत्व है, जिसे चार भागों में वर्गीकृत किया गया है: आहार दान, औषधि दान, अभय दान और ज्ञान दान। यह मान्यता है कि दान से धर्म साधना को बढ़ावा मिलता है, इसलिए इसे ‘तीर्थ’ की संज्ञा भी दी जाती है। इसी परंपरा का पालन करते हुए मंदिर में श्रद्धालुओं को गन्ने का रस वितरित किया गया। डॉ. सारांश जैन और डॉ. तनुप्रिया जैन परिवार ने इस सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।इस अवसर पर मंदिर के मंत्री आलोक जैन, संदीप, रचित, अमित, विनय कपूर, जय कुमार, प्रकाश चंद, राकेश और दीपक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में अनुशासन और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।


