चंडीगढ़ में सड़कों पर खड़ी नहीं कर सकेंगे गाड़ियां:खाली पड़ी जमीन पर पार्किंग बनेगी, पहले वाली की कैपेसिटी बढ़ेगी, बंद मल्टी पार्किंग दोबारा शुरू होगी

चंडीगढ़ में सड़कों पर खड़ी नहीं कर सकेंगे गाड़ियां:खाली पड़ी जमीन पर पार्किंग बनेगी, पहले वाली की कैपेसिटी बढ़ेगी, बंद मल्टी पार्किंग दोबारा शुरू होगी

चंडीगढ़ में लोगों की आबादी से ज्यादा वाहन हो गए हैं, जिससे पार्किंग की समस्या लगातार बढ़ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम नई स्ट्रेटजी पर काम कर रहा है। शहर में जहां-जहां खाली जमीन पड़ी है, उसे चिन्हित किया जा रहा है, ताकि वहां अस्थायी पार्किंग बनाई जा सके। अभी लोग अपनी गाड़ियां सड़कों पर खड़ी कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक प्रभावित होता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को निर्धारित पार्किंग में ही खड़ा करना होगा, जिससे सड़कों पर जगह खाली रहेगी और यातायात सुचारू रहेगा। इन पार्किंग स्थलों को बनाने और चलाने की जिम्मेदारी नगर निगम के पास ही रहेगी। इसके साथ ही बंद पड़ी मल्टी लेवल पार्किंग को भी दोबारा शुरू करने की तैयारी है। साथ ही जो अभी चल रही हैं, उनकी कैपेसिटी भी बढ़ेगी। निगम ने कुछ अंडरग्राउंड पार्किंग को आईआईटी रुड़की के स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था। अब इन्हें हटाकर नई और आधुनिक मल्टी लेवल पार्किंग बनाने की योजना है। नगर निगम मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि कोशिश है कि चंडीगढ़ को मॉडल शहर बनाया जाए और लोगों को बेहतर सुविधाएं दी जाएं। इसके लिए निगम ने रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (RLA) से करीब 10 लाख वाहनों का डेटा भी जुटाया है। इस मुद्दे को प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी उठा चुके हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि जगह की कमी को देखते हुए मल्टी लेवल पार्किंग बनाई जाए और मामूली शुल्क लेकर लोगों को बेहतर सुविधा दी जाए, जिससे नगर निगम को भी राजस्व मिल सके और शहर के विकास में मदद हो। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके शहर के सभी 56 सेक्टरों में पार्किंग की समस्या है। रिहायशी इलाकों में रात के समय दिक्कत ज्यादा बढ़ जाती है, कॉमर्शियल एरिया में भी दिनभर पार्किंग का दबाव बना रहता है। लोगों सड़कों पर वाहन रखकर चले जाते हैं, जिससे कई वार जाम की स्थिति बन जाती है। जर्जर ढांचों को गिराकर नई पार्किंग बनेगी सेक्टर 17 में मौजूद दो पुरानी अंडरग्राउंड पार्किंग को आईआईटी रुड़की के स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था। अब नगर निगम इन जर्जर ढांचों को गिराकर उनकी जगह नई और आधुनिक मल्टी-लेवल पार्किंग बनाने की योजना पर काम कर रहा है। नई पार्किंग के लिए प्राथमिकता नई पार्किंग के लिए रिहायशी और कमर्शियल दोनों क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि लोगों को वाहन खड़े करने में परेशानी न हो। फिलहाल शहर के लगभग सभी सेक्टरों में पार्किंग की दिक्कत बनी हुई है। चुड़ीगढ़ में कुछ 56 सेक्टर हैं। जमीन की पहचान और प्लानिंग नगर निगम पहले उन स्थानों की पहचान करेगा जहां खाली जमीन उपलब्ध है। कोशिश होगी कि एक बार साइट फाइनल होने के बाद बार-बार बदलाव न करना पड़े। शहर के अलग-अलग सेक्टरों में खाली पड़ी जमीन को पार्किंग के लिए उपयोग में लाया जाएगा प्रोजेक्ट का मॉडल, जमीन की स्थिति यह पार्किंग प्रोजेक्ट पूरी तरह नगर निगम द्वारा ही तैयार और संचालित किया जाएगा। इसे PPP मॉडल (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) पर नहीं दिया जाएगा।अ स्थायी और स्थायी पार्किंग के लिए चिन्हित की जा रही सभी जमीन नगर निगम की अपनी (सरकारी) जमीन है। शहर में कई ऐसे प्लॉट हैं, जहां अभी तक कोई निर्माण या योजना नहीं बनी है। पार्किंग चार्ज और पास सिस्टम फिलहाल नए चार्ज तय नहीं किए गए हैं, लेकिन नगर निगम पहले से 89 पार्किंग स्थलों पर “वन पास सिस्टम” चला रहा है। चार पहिया वाहन- ₹500, दो पहिया वाहन- ₹250 पास। ऑनलाइन और काउंटर दोनों जगह उपलब्ध हैं। नगर निगम की वेबसाइट के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इस तरह किया जाएगा सर्वे नगर निगम ने आदेश में कहा गया है कि ऐसी खाली पड़ी जमीन या प्लॉट ढूंढे जाएं, जहां अस्थायी पार्किंग बनाई जा सके। जो पार्किंग स्थल पहले से चल रहे हैं, उन्हें बड़ा किया जाए और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएं। पार्किंग स्थलों पर अच्छी लाइट, आने-जाने के लिए आसान रास्ते, समतल जमीन और बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को इन स्थानों की फोटो और पूरी जानकारी के साथ जल्द से जल्द रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में अगली मीटिंग में फैसला लिया जाएगा। आरएलए से दस लाख वाहनों का डाटा लिया नगर निगम की कोशिश यही है कि शहर के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने वाहनों से आते हैं, उन्हें उचित पेड पार्किंग की सुविधा मिले। साथ ही उन्हें जेब पर बोझ भी न पड़े। इसके लिए निगम ने दस लाख वाहन चालकों का डेटा लिया है। अब उन्हें मैसेज भेजे जाएंगे। साथ ही उन्हें पार्किंग पास बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शहर की 13 लाख आबादी, 15 लाख वाहन एक रिपोर्ट में अनुसार, शहर में रजिस्टर्ड वाहनों की कुल संख्या लगभग 15 लाख के करीब पहुंच गई है, जबकि अनुमानित मानवीय आबादी लगभग 13 लाख है। चंडीगढ़ में प्रति घर औसत 2 से अधिक वाहन हैं। महिलाओं के बीच “थार” जैसे वाहनों का चलन बढ़ा है। दिसंबर 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, उस साल में महिलाओं द्वारा लगभग 600 थार/जीप पंजीकरण किए गए थे। (टू-व्हीलर) वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा है (लगभग 69%), इसके बाद कारों का नंबर आता है (लगभग 22%) है। **************** ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ की आलीशान कोठियों में रह सकेंगे टूरिस्ट: महंगे होटलों का खर्च बचेगा, कोठी मालिक को होगी कमाई; बिजली-पानी खर्च घरेलू ही रहेगा चंडीगढ़ आने वाले टूरिस्टों को अब महंगे होटलों का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। वह चंडीगढ़ की आलीशान कोठियों में ठहर सकेंगे। यही नहीं, कोठी मालिकों को इससे न केवल कमाई होगी बल्कि उन्हें घरेलू दरों पर ही टैक्स और बिजली बिल देना होगा। घर को ‘कमर्शियल’ इकाई नहीं माना जाएगा। (पढ़ें पूरी खबर)

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