वाराणसी के अस्सी क्षेत्र स्थित श्री दक्षिणामूर्ति मठ में इन दिनों शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती का मंगलमय प्रवास चल रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। संगोष्ठी के दौरान धर्म, आध्यात्म, समाज और राष्ट्र से जुड़े विविध प्रश्नों पर शंकराचार्य ने विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए और जिज्ञासुओं की शंकाओं का समाधान किया। हिन्दू राष्ट्र और गौमाता पर रखी अपनी बात संगोष्ठी में भारत के हिन्दू राष्ट्र बनने तथा गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने से संबंधित प्रश्न उठाया गया। इस पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सत्तालोलुप और अदूरदर्शी राजनीति के कारण सनातन धर्म के मान-बिंदुओं की समुचित रक्षा नहीं हो पा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो नेता पूर्व में किसी राज्य के मुख्यमंत्री रहते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से देशभर में गोहत्या पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग करते थे, वही प्रधानमंत्री बनने के बाद गौरक्षकों के लिए गुंडे शब्द का प्रयोग करते नजर आते हैं। इस प्रकार की राजनीतिक दोहरापन राष्ट्र और धर्म दोनों के लिए हानिकारक है। शंकराचार्य ने गृहस्थ आश्रम की महत्ता को बताया गृहस्थ जीवन की श्रेष्ठता से जुड़े प्रश्न के उत्तर में महाराजश्री ने सनातन परंपरा में गृहस्थ आश्रम की विशेष भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम के दो प्रमुख उद्देश्य हैं— पहला, वंश परंपरा का संरक्षण और निरंतरता; दूसरा, पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों के बीच रहते हुए व्यक्ति का धीरे-धीरे वैराग्य की ओर उन्मुख होना। उन्होंने स्पष्ट किया कि गृहस्थ जीवन केवल भोग का माध्यम नहीं, बल्कि साधना और आत्मविकास का महत्वपूर्ण चरण है, जहां व्यक्ति जीवन के वास्तविक अर्थ को समझ सकता है। श्री दक्षिणामूर्ति मंदिर में होगा शिव दरबार इसी अवसर पर डॉ. पद्माकर ने श्रीदक्षिणामूर्ति मंदिर के जीर्णोद्धार और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और मंदिर पर अंकित वैदिक कालीन संकेतों के अध्ययन से इसकी आयु लगभग 1964 वर्ष आंकी गई है। जीर्णोद्धार के पश्चात मंदिर में विराजमान भगवान श्री दक्षिणामूर्ति को भगवान भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। आने वाले समय में मंदिर परिसर में भव्य शिव दरबार स्थापित किया जाएगा, जिसमें शिवलिंग, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। इसके अतिरिक्त भगवान हनुमान की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।


