UN में आयोजित सस्टेनेबल डेवलपमेंट वर्ल्ड फोरम में भारत का प्रतिनिधि डॉ. रीनू यादव ने किया। रीनू यादव शुक्रवार को भारत लौट आई है। लेकिन यूएन में उनके संबोधन को हमेशा याद रखा जाएगा। अपने भाषण में उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर मजबूत आवाज उठाई। उन्होंने साफ कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण सस्टेनेबल डेवलपमेंट का कोई अतिरिक्त हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी असली नींव है। महिलाओं को साइडलाइन नहीं, सेंटर में रखना होगा अपने संबोधन में उन्होंने वर्ल्ड लीडर्स से अपील की कि जेंडर इक्वैलिटी को डेवलपमेंट प्लान के केंद्र में रखा जाए। उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को साइडलाइन करने की सोच छोड़नी होगी और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में बराबरी से शामिल करना होगा। भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व डॉ. यादव ने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं इस मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हूं। यहां दुनिया भर के लीडर्स के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत और आइडियाज का आदान-प्रदान हुआ।” उनकी इस बात पर हॉल में खासा उत्साह देखने को मिला। धीमी रफ्तार से नहीं होगा बदलाव उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर अब धीरे-धीरे बदलाव की सोच से काम नहीं चलेगा। “महिलाओं का सशक्तिकरण सस्टेनेबल डेवलपमेंट की नींव है। जेंडर इक्वैलिटी को सपना नहीं, हकीकत बनाना होगा।” SDGs से सीधा जुड़ी महिलाओं की लीडरशिप उन्होंने बताया कि महिलाओं की लीडरशिप सीधे Sustainable Development Goals (SDGs) से जुड़ी है। चाहे क्लाइमेट क्राइसिस हो या आर्थिक विकास। हर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका निर्णायक है। महिलाओं की भागीदारी के बिना बदलाव असंभव उन्होंने कहा, “सशक्त महिलाएं नए आइडियाज लाती हैं, मुश्किल समय में समुदाय को संभालती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार करती हैं। महिलाओं की पूरी भागीदारी के बिना बदलाव मुमकिन नहीं है।” तीन चाबियां: शिक्षा, आर्थिक आजादी और निर्णय शक्ति डॉ. यादव ने महिलाओं की प्रगति के लिए तीन जरूरी स्तंभ बताए। शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की शक्ति। उन्होंने कहा कि महिलाओं में निवेश करना, दरअसल एक सस्टेनेबल भविष्य में निवेश करना है। वुमन हेल्थ एम्पावरमेंट कैंपेन का जिक्र अपने संबोधन के अंत में उन्होंने Women Health Empowerment Campaign के जरिए काम जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा, “जब महिलाएं तन, मन और अपने फैसलों में मजबूत होती हैं, तभी वे एक बेहतर और बराबरी वाली दुनिया बना सकती हैं।” स्पीच को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन उनके भाषण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जबरदस्त समर्थन मिला। कई डेलिगेट्स ने उनकी उस बात को खास तौर पर नोट किया जिसमें उन्होंने कहा कि केवल SDGs हासिल करना ही नहीं, बल्कि उससे आगे बढ़कर न्यायपूर्ण और समानता आधारित दुनिया बनाना लक्ष्य होना चाहिए। UN का सस्टेनेबल डेवलपमेंट वर्ल्ड फोरम इस सप्ताह जारी है, जहां जेंडर इक्वैलिटी और क्लाइमेट एक्शन प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।


