हनुमानगढ़ में बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में जोधपुर विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में आंदोलन की रणनीति तैयार की गई और 30 अप्रैल को जोधपुर में प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को सफल बनाने का आह्वान किया गया। अधीक्षण अभियंता कार्यालय के मीटिंग हॉल में हुई इस बैठक में जिलेभर से कर्मचारी, अधिकारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। निजीकरण के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली विभाग के निजीकरण से कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होंगे। इसके साथ ही, आम उपभोक्ताओं को भी महंगी बिजली और खराब सेवाओं का सामना करना पड़ सकता है। कर्मचारियों से एकजुट होकर इसका विरोध करने की अपील की गई।
कार्यक्रम में प्रदेश स्तर के कई पदाधिकारी भी शामिल हुए, जिन्होंने कर्मचारियों को आंदोलन की रणनीति और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। कर्मचारी नेता राजेंद्र सीकर ने बताया कि आरवीटीकेए के प्रदेश उपाध्यक्ष रामप्रकाश जाट, जोधपुर विद्युत वितरण श्रमिक संघ (बीएमएस) के करण सिंह राजपुरोहित, आरवीएमएस के डॉ. लिखमाराम जाखड़, बीईएजोड के गिरधारी लाल सियाग, केएमएस के रामकुमार व्यास, इंटक के मोहम्मद सलीम और पीईएआर के दिनेश तलवानिया सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कर्मचारियों ने निजीकरण के संभावित दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में भी विभाग में संसाधनों और स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं हैं। इन समस्याओं को दूर करने के बजाय निजीकरण की दिशा में कदम उठाना उचित नहीं है। संघर्ष समिति ने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन से जुड़ें। विशेष रूप से, 30 अप्रैल को जोधपुर डिस्कॉम मुख्यालय पर आयोजित होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया गया।


