समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में 1000 क्विंटल की सीमा:सीहोर में किसान हो रहे परेशान, घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में 1000 क्विंटल की सीमा:सीहोर में किसान हो रहे परेशान, घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ

सीहोर जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की धीमी गति किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। खरीदी प्रक्रिया पहले ही देरी से शुरू हुई थी और अब शासन द्वारा निर्धारित प्रतिदिन 1000 क्विंटल की सीमा ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अधिकांश खरीदी केंद्रों पर यह कोटा थोड़ी ही देर में पूरा हो जाता है। इसके चलते दूर-दराज से अपनी ट्रॉली भरकर आए किसानों को घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौटना पड़ता है और अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है। किसान एमएस मेवाड़ा ने बताया कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो किसानों की फसल का तौल दो महीने में भी पूरा नहीं हो पाएगा। वर्तमान सीमा के कारण एक दिन में केवल 25 से 30 ट्रॉली का ही तौल हो पाता है, जबकि केंद्रों की क्षमता इससे कहीं अधिक है। हम्मालों का भी कहना है कि वे प्रतिदिन 2 से 3 हजार क्विंटल तक तौल कर सकते हैं, लेकिन इस सीमा ने उनकी कार्यक्षमता को बाधित किया है। इस अव्यवस्था का सबसे अधिक असर छोटे किसानों पर पड़ रहा है। जिन किसानों के पास 2 से 3 एकड़ जमीन है, उन्हें अपनी पूरी उपज तौल कराने के लिए बार-बार खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उनके समय के साथ-साथ परिवहन का खर्च भी बढ़ रहा है। कई किसान आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और फसल बेचकर तुरंत पैसों की आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। खरीदी केंद्रों पर काम करने वाले मजदूरों की हालत भी खराब है। उन्हें प्रति क्विंटल महज 7 रुपये मिलते हैं, और दिनभर में मुश्किल से 400-500 रुपये की कमाई हो पाती है। भोजन का खर्च निकालने के बाद उनके पास बहुत कम बचता है। मजदूरों का कहना है कि यदि तौल की मात्रा बढ़ती है, तो उन्हें भी बेहतर आमदनी मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि जिले के कुल 737 किसानों से 3283.05 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। अभी तक जिले में 122 टन चना और 96 टन मसूर की खरीदी की जा चुकी है।

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