लखनऊ में दिखी उत्तराखंड की लोक संस्कृति:गोमती नगर में ‘स्याल्दे बिखौती’ मेले का आयोजन

लखनऊ में दिखी उत्तराखंड की लोक संस्कृति:गोमती नगर में ‘स्याल्दे बिखौती’ मेले का आयोजन

लखनऊ के गोमती नगर में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक उस समय देखने को मिली, जब पर्वतीय महापरिषद भवन में ऐतिहासिक ‘स्याल्दे बिखौती’ मेले का आयोजन किया गया। श्री रामलीला समिति और पर्वतीय महापरिषद शाखा के संयुक्त सहयोग से इस मेले में रंग, संगीत और परंपरा का अद्भुत संगम नजर आया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गणेश चन्द्र जोशी और विशिष्ट अतिथि के रूप में महेन्द्र सिंह रावत मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण और बुके भेंट कर किया गया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ अतिथियों का अभिनंदन किया, जिससे माहौल और भी आत्मीय हो उठा। मुख्य आकर्षण झोड़ा नृत्य और लोक गायन रहा मेले का मुख्य आकर्षण उत्तराखंड की पारंपरिक झोड़ा नृत्य और लोक गायन रहा। कार्यक्रम की शुरुआत वंदना गीत से हुई, जिसके बाद हारमोनियम पर नरेन्द्र सिंह फर्त्याल के साथ कलाकारों ने लोकधुनों की शानदार प्रस्तुति दी। मैदान में 250 से अधिक महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक झोड़ा नृत्य कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुराने और नए झोड़ा गीतों पर थिरकते कदमों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, समाजसेवी और पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। दर्शकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। मेले में पारंपरिक संस्कृति के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देखने को मिला। हर साल वैशाख माह में आयोजित होता है स्याल्दे बिखौती मेले का इतिहास भी बेहद रोचक है। यह मेला उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट कस्बे में हर साल वैशाख माह में आयोजित होता है। चैत्र मास के अंतिम दिन विभाण्डेश्वर मंदिर में और वैशाख की पहली तिथि को द्वाराहाट बाजार में यह मेला लगता है। इसकी तैयारियां गांवों में एक महीने पहले ही शुरू हो जाती हैं और फूलदेई संक्रांति से इसका माहौल बनने लगता है।

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