Patrika Live: कैमरों की नजर में शहर, एक घंटे में 165 बिना हेलमेट, 107 ओवर स्पीड के मामले, लेकिन सिस्टम की रफ्तार पीछे

Patrika Live: कैमरों की नजर में शहर, एक घंटे में 165 बिना हेलमेट, 107 ओवर स्पीड के मामले, लेकिन सिस्टम की रफ्तार पीछे

Patrika Live: ताबीर हुसैन. जय स्तंभ चौक स्थित मल्टीपार्किंग के आखिरी माले पर बने एआई और आधुनिक कैमरों से लैस इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) में राजधानी की सड़कों की हर हरकत कैद हो रही है। लगभग 100 लोकेशन पर लगे 700 कैमरों के जरिए शहर की निगरानी की जा रही है। दोपहर 3.57 बजे जब पत्रिका टीम यहां पहुंची तो ऑपरेटर्स और पुलिसकर्मी अपनी-अपनी स्क्रीन पर मॉनिटरिंग से लेकर चालान प्रक्रिया में जुटे हुए थे। बड़ी स्क्रीन पर कालीबाड़ी, भगत सिंह चौक, सरोना, रेलवे स्टेशन, शास्त्री चौक, रविवि गेट और जय स्तंभ चौक जैसे प्रमुख स्थानों के लाइव दृश्य चल रहे थे। करीब एक घंटे तक इन लोकेशनों की निगरानी के बाद जो आंकड़े सामने आए वे चौंकाने वाले थे।

Patrika Live: नियम तोडऩे में तेलीबांधा चौक सबसे आगे, शारदा चौक सबसे पीछे

सिर्फ एक घंटे में बिना हेलमेट के 165 मामले दर्ज हुए। इसके अलावा ओवर स्पीड के 107, ट्रिपल राइडिंग के 58, गलत दिशा में चलने के 42 और सिग्नल जंप के 25 मामले कैमरों ने रिकॉर्ड किए। हालांकि, इन सभी मामलों में कितनों का चालान हुआ इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। नियम तोडऩे में तेलीबांधा चौक सबसे आगे रहा, जबकि तुलनात्मक रूप से शारदा चौक पर सबसे कम उल्लंघन दर्ज किए गए। कैमरे तो पूरी मुस्तैदी से हर उल्लंघन को पकड़ रहे हैं लेकिन किसे चालान भेजना है और किसे छोडऩा है यह निर्णय अब भी ऑपरेटर्स के हाथ में है। उनका कहना है कि उनका काम केवल चालान बनाकर भेजना है और हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यहां तक कि इस सिस्टम से जजों तक के चालान भी भेजे जा चुके हैं।

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नियम टूटने पर तुरंत अलर्ट सिस्टम नहीं

असल समस्या सिस्टम की क्षमता और संसाधनों की कमी है। एक घंटे में जितने मामले सामने आते हैं उतने चालान तुरंत भेज पाना संभव नहीं हो पाता क्योंकि न तो पर्याप्त ऑपरेटर्स या पुलिसकर्मी हैं और न ही प्रक्रिया इतनी तेज है। मॉनिटरिंग के दौरान एक और कमी साफ नजर आई। बड़ी स्क्रीन पर सिर्फ लोकेशन का लाइव दृश्य दिखता है लेकिन कहीं भी ऐसा पॉपअप या अलर्ट सिस्टम नहीं है जिससे तुरंत पता चल सके कि किस जगह नियम तोड़ा जा रहा है। जबकि जरूरत इस बात की है कि जैसे ही किसी क्षेत्र में उल्लंघन हो स्क्रीन पर तुरंत लाल संकेत के साथ पॉपअप दिखाई दे ताकि कार्रवाई और तेज और प्रभावी हो सके। यानी कैमरे तो चौकन्ने हैं लेकिन सिस्टम की सुस्ती अब भी ट्रैफिक अनुशासन की राह में बाधा बनी हुई है।

सीधी-बात: 50 ब्लाइंड स्पॉट, जहां कैमरे ही नहीं

सबसे ज्यादा किस तरह के नियम तोड़े जाते हैं?

  • बिना हेलमेट चलने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है जो करीब 35-40 प्रतिशत तक रहती है। इसके बाद तीन सवारी के मामले लगभग 15 प्रतिशत के आसपास होते हैं।

ब्लाइंड स्पॉट कितने जहां कैमरों की नजर नहीं?

  • लगभग 50 ब्लाइंड स्पॉट हैं जहां हमने कैमरे के लिए प्रस्ताव भेजा है। क्या हर डिटेक्ट हुए केस में चालान बनता है?
  • नहीं, ऐसा जरूरी नहीं है। डिटेक्शन ज्यादा होता है लेकिन हर केस के वैलिडेशन के बाद ही चालान भेजा जाता है।

शहर में कैमरों को लेकर क्या योजना है?

  • करीब 100 लोकेशनों पर कैमरे लगाने की योजना है। इनमें से कुछ क्राइम डिटेक्शन और करीब 50 ट्रैफिक मॉनिटरिंग के लिए होंगे।

कैमरे चालान कैसे तय करते हैं?

  • कैमरे सभी वाहनों को कैप्चर करते हैं लेकिन चालान सॉफ्टवेयर और कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारियों के वैलिडेशन के बाद ही बनता है। कई बार नंबर प्लेट गलत पढ़ी जाती है इसलिए जांच जरूरी होती है।

क्या आम नागरिक भी चालान प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं?

  • हां, परिवहन ऐप के जरिए कोई भी व्यक्ति नियम उल्लंघन की फोटो अपलोड कर सकता है। जैसे नो पार्किंग में खड़ी गाड़ी। अगर फोटो स्पष्ट है, तो उस पर कार्रवाई होती है। क्या सरकारी वाहनों को चालान से छूट मिलती है?
  • नहीं, किसी को भी छूट नहीं है। नियम तोडऩे पर सरकारी वाहनों का भी चालान किया जाता है। अगर किसी का चालान गलत हो जाए तो क्या होता है?
  • ऐसे मामलों में शिकायत सुनी जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि जैसे अगर किसी ने एम्बुलेंस को रास्ता देने के लिए नियम तोड़ा हो तो उसका निराकरण किया जाता है।

नियम टूटने पर स्क्रीन पर अलर्ट मैसेज क्यों नहीं आता?

  • लाल निशान आता है। स्क्रीन के जिस तरफ हर नंबर का स्कैन शो होता है वहीं कोने में लाल निशान दिखाई देता है।
  • गुरजीत सिंह, एसीपी ट्रैफिक

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